Kamada Ekadashi 2026: एक ऐसा व्रत जो पिशाच योनि से भी दिला दे मुक्ति, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Published On: March 25, 2026
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Kamada Ekadashi 2026: एक ऐसा व्रत जो पिशाच योनि से भी दिला दे मुक्ति, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

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Kamada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। यह व्रत जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। हर माह में दो एकादशी आती हैं, लेकिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसे ‘कामदा एकादशी’ (Kamada Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है—’कामदा’ यानी कामनाओं को पूर्ण करने वाली। मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से उपवास रखते हैं, उनके सभी पाप धूल जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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तारीख को लेकर क्यों है असमंजस? (Kamada Ekadashi 2026 Date Confusion)

साल 2026 में कामदा एकादशी की तिथि को लेकर भक्तों के बीच थोड़ी उलझन देखी जा रही है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 28 मार्च 2026, शनिवार को सुबह 08:46 बजे से शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 29 मार्च 2026, रविवार को सुबह 07:45 बजे समाप्त होगी।

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अब सवाल यह उठता है कि व्रत किस दिन रखा जाए? हिंदू धर्म में ‘उदयातिथि’ (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) का विशेष महत्व होता है। चूँकि 29 मार्च को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए 29 मार्च 2026 (रविवार) को ही कामदा एकादशी का व्रत रखना शास्त्रों के अनुसार श्रेष्ठ और फलदायी होगा।

पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (Kamada Ekadashi 2026 Shubh Muhurat)

यदि आप घर पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा करना चाहते हैं, तो 29 मार्च को सुबह 07:48 से दोपहर 12:26 तक का समय सबसे उत्तम है। इस अवधि में की गई पूजा का अक्षय फल प्राप्त होता है।

व्रत का पारण कब करें? (Parana Time 2026)

किसी भी व्रत की पूर्णता उसके पारण (व्रत खोलने) से होती है। कामदा एकादशी व्रत का पारण 30 मार्च 2026, सोमवार को किया जाएगा। पारण का सही समय सुबह 06:31 से 07:09 के बीच है। ध्यान रहे कि पारण हमेशा शुभ समय में ही करना चाहिए, अन्यथा व्रत का पूर्ण लाभ नहीं मिलता।

कामदा एकादशी का पौराणिक महत्व: शाप से मुक्ति का मार्ग

पद्म पुराण में इस एकादशी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि यह व्रत इतना शक्तिशाली है कि यह व्यक्ति को ‘पिशाचत्व’ (राक्षस योनि) जैसे भीषण दोषों से भी मुक्ति दिला सकता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अंजाने में हुए पापों या किसी के दिए गए शाप के प्रभाव को खत्म करने के लिए कामदा एकादशी का व्रत रामबाण माना जाता है। यह न केवल वर्तमान जीवन में सुख-समृद्धि लाता है, बल्कि मृत्यु के पश्चात मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

घर पर कैसे करें पूजा? (Kamada Ekadashi Puja Vidhi)

कामदा एकादशी की पूजा विधि अत्यंत सरल है, बस इसमें शुद्धता और श्रद्धा का होना अनिवार्य है:

  1. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। भगवान के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

  2. स्थापना: मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। श्रीहरि को पीले फूल, हल्दी, चंदन और फल अर्पित करें।

  3. तुलसी दल का महत्व: विष्णु जी की पूजा में ‘तुलसी’ का होना अनिवार्य है। बिना तुलसी के वह भोग स्वीकार नहीं करते।

  4. मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का निरंतर जाप करें और कामदा एकादशी की कथा का पाठ करें।

  5. दान-पुण्य: एकादशी के दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अनाज और जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

कामदा एकादशी सिर्फ एक उपवास नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का एक अवसर है। यदि आप भी जीवन की बाधाओं से मुक्ति चाहते हैं और श्रीहरि का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो 29 मार्च 2026 को पूरी निष्ठा के साथ यह व्रत अवश्य रखें।


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