इतिहास के पन्ने

मां की मौत का दुख आंखों में लिए देश हित हेतु जब राजीव गांधी ने उसी दिन ली पीएम पद की शपथ

Today’s history – भारत मे कम्प्यूटर क्रांति के जनक कहे जाने वाले राजीव गांधी का संघर्ष काफी कठीन रहा। उन्होंने भारत के विकास हेतु कई प्रयास किए और भारत को तकनीकी से जोड़ा। उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार कहा जाता है। वहीं वह भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे।

राजीव गांधी भारत के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार से थे। लेकिन उनकी रुचि राजनीति में कभी नहीं रही। वह सदैव अपना जीवन सादगी के साथ व्यतीत करना चाहते थे।1980 में छोटे भाई संजय गांधी की एक हवाई जहाज दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद राजीव ने राजनीति में प्रवेश किया।

साल 1981 में वह अमेठी से सांसद बने और यहीं से उनके रजनीतिक विकास की गाड़ी ने रफ्तार पकड़ी। साल 1985 से 1991 तक वह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे। लेकिन साल 1984 राजीव गांधी के लिए काफी कठिन दौर रहा। उस समय राजीव गांधी की माता और भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई थी। 

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरा गांधी परिवार खौफ में थे। राजनैतिक पार्टी में बिखराव के संकेत सामने आने लगे और राजनीतिक विशेषज्ञ ने इंदिरा गांधी की मौत वाले दिन ही राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। राजीव गांधी ने राष्ट्र हित हेतु भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए 31 अक्टूबर 1984 से 1 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर कार्य किया।

राजीव गांधी काफी महान व्यक्ति थे। उन्होंने देश हित के लिए काफी कुछ किया। उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। वहीं 21 मई 1991 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में लिट्‍टे आतंकवादियों ने हत्या कर दी गई थी। 

राजीव गांधी ने अपनी मां की मौत वाले दिन ही देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। उनका यह बलिदान इस बात का साक्ष्य था कि राजीव गांधी देश प्रेम के लिए समर्पित थे और मां के वियोग को सहते हुए उन्होंने देश को बिखरने से बचाने हेतु अपने कर्त्तव्य का निर्वहन किया।

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