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Join NowYogi Adityanath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ ने नंदकुमार विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। योगी आदित्यनाथ का यह दौरा महज एक चुनावी रैली नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के खिलाफ एक सीधा युद्धघोष नजर आया। अपने चिर-परिचित अंदाज में योगी ने न केवल सरकार की खामियां गिनाईं, बल्कि बंगाल की खोई हुई सांस्कृतिक पहचान को वापस लाने का संकल्प भी दोहराया।
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TMC का नया मतलब: “तुष्टिकरण, माफिया और कट मनी”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीएमसी के बहुचर्चित नारे ‘मां-माटी-मानुष’ पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज इस नारे की हकीकत बदल चुकी है। योगी के अनुसार, “आज बंगाल में मां और बेटियां असुरक्षित हैं, यहां की माटी पर घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया है और आम मानुष (इंसान) भय के साये में जीने को मजबूर है।” उन्होंने टीएमसी का नया अर्थ बताते हुए इसे “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” की सरकार करार दिया। योगी ने कहा कि जिस बंगाल ने कभी पूरे देश को दिशा दी थी, आज वही बंगाल भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ है।
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सांस्कृतिक गौरव बनाम वर्तमान अराजकता
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में बंगाल की महान विभूतियों—स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, और गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यह वही धरती है जहां से ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ का उद्घोष हुआ, लेकिन आज यहाँ तुष्टिकरण की राजनीति के कारण हिंदू त्योहारों पर संकट है। योगी ने सवाल उठाया कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्लेआम होता है, तो ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी दल चुप्पी क्यों साध लेते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के लिए बंगाल की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को जानबूझकर बदला जा रहा है।
“यूपी में सब चंगा, अब बंगाल की बारी”
रैली में सबसे ज्यादा तालियां तब बजीं जब योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “2017 से पहले यूपी की हालत भी बंगाल जैसी ही थी—हर तीसरे दिन दंगे और गुंडागर्दी। लेकिन जब से ‘डबल इंजन’ की सरकार आई है, तब से न वहां कर्फ्यू लगता है और न ही दंगे होते हैं। आज यूपी में सब चंगा है।” उन्होंने माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें बनाने के काम नहीं आता, बल्कि वह माफियाओं का ‘इलाज’ करना भी बखूबी जानता है। योगी ने स्पष्ट संदेश दिया कि बंगाल में भी अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
भाषा और अस्मिता का मुद्दा: उर्दू बनाम बांग्ला
योगी आदित्यनाथ ने कोलकाता के मेयर के उस कथित बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई जिसमें उर्दू को थोपने की बात कही गई थी। योगी ने गरजते हुए कहा, “बंगाल की पहचान उसकी बांग्ला भाषा और संस्कृति से है। जो लोग यहाँ उर्दू थोपने की साजिश कर रहे हैं, उन्हें जान लेना चाहिए कि बंगाल में बांग्ला ही चलेगी। हम बंगाली अस्मिता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
परिवर्तन का आह्वान
भाषण के अंत में योगी आदित्यनाथ ने जनता से अपील की कि वे आने वाले चुनावों में भाजपा प्रत्याशी निर्मल खानरा और अभिजीत गांगुली जैसे राष्ट्रभक्तों को समर्थन दें। उन्होंने कहा कि बंगाल को फिर से “भारत की सांस्कृतिक राजधानी” बनाने के लिए तुष्टिकरण के इस सिंडिकेट को तोड़ना अनिवार्य है। यह जनसभा इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में ‘बुलडोजर मॉडल’ और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के मुद्दे और भी ज्यादा गरमाने वाले हैं।









