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Join NowIntermittent Fasting side effects: आजकल वजन घटाने और फिट दिखने की दुनिया में ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ (Intermittent Fasting) एक जादुई मंत्र की तरह लोकप्रिय हो चुका है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर कोई इसके फायदे गिना रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सिक्के का दूसरा, खतरनाक पहलू देखने की कोशिश की है? क्या पतले होने की यह सनक आपकी सेहत पर इतनी भारी पड़ सकती है कि बात जान पर बन आए?
हाल ही में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ (Journal of the American Heart Association) में प्रकाशित एक नई स्टडी ने इस ट्रेंड को फॉलो करने वालों के पैरों तले जमीन खिसका दी है. यह स्टडी उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनी जीवनशैली बना रहे हैं.
क्या कहती है यह चौंकाने वाली स्टडी? (What the Study Reveals)
यह कोई छोटी-मोटी रिसर्च नहीं है. हजारों लोगों पर कई सालों तक की गई इस व्यापक स्टडी के नतीजे बेहद चिंताजनक हैं. रिसर्च के मुताबिक, जो लोग लंबे समय तक इंटरमिटेंट फास्टिंग (विशेषकर 8 घंटे से कम समय में अपना सारा भोजन करने वाले) करते हैं, उनमें सामान्य डाइट वालों की तुलना में:
दिल की बीमारी (Heart Disease) से मौत का खतरा 91% तक बढ़ सकता है.
यह खुलासा उन लोगों के लिए एक खतरे की घंटी है जो वजन घटाने के शॉर्टकट के रूप में इसे अपना रहे हैं. स्टडी साफ तौर पर इशारा करती है कि लंबे समय तक शरीर को भूखा रखने की यह प्रक्रिया दिल पर गंभीर और जानलेवा दुष्प्रभाव डाल सकती है.
कैसे काम करता है इंटरमिटेंट फास्टिंग? (How Intermittent Fasting Works)
इस डाइट पैटर्न में लोग खाने के घंटों पर ध्यान देते हैं, न कि कैलोरी पर. इसका सबसे पॉपुलर तरीका है 16:8, जिसमें व्यक्ति दिन में 16 घंटे का उपवास (फास्ट) रखता है और केवल 8 घंटे की विंडो में ही अपना सारा भोजन करता है. माना यह जाता है कि लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर जमा हुई चर्बी (फैट) को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगता है, जिससे वजन तेजी से घटता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है.
लेकिन जब शरीर को सही पोषण और सही समय पर ऊर्जा नहीं मिलती, तो यही तरीका दुश्मन बन जाता है.
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सिर्फ फायदा नहीं, ये हैं गंभीर नुकसान (Potential Dangers and Side Effects)
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पोषण की भारी कमी: जब आप सिर्फ 8 घंटे में खाते हैं, तो अक्सर शरीर के लिए जरूरी सभी विटामिन्स, मिनरल्स, और प्रोटीन की पूर्ति करना मुश्किल हो जाता है. इससे शरीर अंदर से कमजोर होने लगता
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दिल की सेहत पर जानलेवा असर: जैसा कि स्टडी बताती लंबे समय तक फास्टिंग करने से हृदय प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता ਹੈ.
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ब्लड शुगर का असंतुलन: खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए यह पैटर्न बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे ब्लड शुगर का लेवल खतरनाक तरीके से अचानक घट (Hypoglycemia) या बढ़ (Hyperglycemia) सकता है.
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मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर: दिनभर भूखा रहने का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, बल्कि दिमाग पर भी पड़ता ਹੈ. इससे मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव और फोकस में कमी जैसी समस्याएं आम हो जाती
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पाचन संबंधी समस्याएं और कमजोरी: लंबे समय तक खाली पेट रहने से एसिडिटी, गैस और पाचन संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं. साथ ही, शरीर में ऊर्जा की कमी से लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है.
किन लोगों के लिए है यह सबसे ज्यादा खतरनाक?
डॉक्टरों की सख्त चेतावनी है कि कुछ लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग भूलकर भी नहीं करनी चाहिए. अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो यह ट्रेंड आपके लिए नहीं है:
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हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
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डायबिटीज (Diabetes)
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दिल से जुड़ी कोई भी बीमारी (Heart Condition)
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हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)
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गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं.
तो क्या करना चाहिए? (The Smart Approach)
इसका मतलब यह नहीं है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए खराब है. लेकिन किसी भी ट्रेंड को आंख बंद करके फॉलो करना मूर्खता है.
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विशेषज्ञ की सलाह लें: इसे शुरू करने से पहले हमेशा डॉक्टर या किसी सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लें. वे आपके शरीर की जरूरतों के हिसाब से सही मार्गदर्शन करेंगे.
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इसे जीवनशैली न बनाएं: इसे वजन घटाने के एक अस्थायी तरीके के रूप में देखें, न कि जीवन भर की आदत. लंबे समय तक लगातार फास्टिंग से बचें.
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हेल्दी खाएं: अपनी ईटिंग विंडो में जंक फूड की जगह पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें. डाइट में हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन और भरपूर पानी शामिल करें.
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शरीर के संकेतों को सुनें: अगर आपको चक्कर, कमजोरी, तेज सिरदर्द या कोई भी असामान्य लक्षण महसूस हो, तो तुरंत फास्टिंग रोक दें और डॉक्टर से संपर्क करें.
इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने का एक टूल हो सकता है, लेकिन यह कोई जादुई छड़ी नहीं है. आपकी सेहत आपकी सबसे बड़ी दौलत है, उसे सोशल मीडिया के किसी ट्रेंड पर दांव पर न लगाएं.