Haridwar: देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार में स्थित विश्व प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार की सुबह जो कुछ हुआ, उसने एक बार फिर पूरे देश को दहला दिया है। आस्था के सैलाब के बीच मची एक भयानक भगदड़ में छह निर्दोष श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, हाल ही में समाप्त हुई कांवड़ यात्रा के बाद जब मंदिर के रास्ते खोले गए, तो दर्शन के लिए भारी तादाद में श्रद्धालु पहुंच गए। इसी अनियंत्रित भीड़ की वजह से मंदिर की सीढ़ियों पर अफरा-तफरी मच गई और यह दर्दनाक हादसा हो गया।

प्रशासन ने घायलों को अस्पताल में भर्ती करा दिया है और स्थिति को नियंत्रण में बताया है। लेकिन चश्मदीदों की मानें तो यह हादसा सिर्फ भीड़ की वजह से नहीं हुआ। एक खौफनाक अफवाह ने मौत का तांडव रचा। बताया जा रहा है कि सीढ़ियों पर लगे बिजली के एक पिलर में शॉर्ट सर्किट की अफवाह उड़ी थी, जिसके बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर-उधर भागने लगे और एक-दूसरे को कुचलते चले गए।

यह पहली बार नहीं है जब भारत में किसी धार्मिक स्थल पर आस्था, अव्यवस्था और लापरवाही का ऐसा जानलेवा कॉकटेल देखने को मिला हो। हाल के वर्षों में धार्मिक स्थलों पर भगदड़ की घटनाओं ने सैकड़ों लोगों की जान ली है। आइए, नजर डालते हैं उन बड़े हादसों पर जो हमें झकझोर कर रख देते हैं और हर बार बेहतर भीड़ प्रबंधन के खोखले दावों की पोल खोलते हैं।


जब-जब पूजा की खुशी मातम में बदली: भारत के 15 सबसे बड़े धार्मिक हादसे

ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भीड़ प्रबंधन की भारी चूक की दर्दनाक कहानियां हैं:

  • 29 जून, 2025: पुरी, ओडिशा: विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान देवताओं के रथों के पास भगदड़ मचने से दो महिलाओं सहित तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कम से कम 50 लोग घायल हो गए।
  • 03 मई, 2025: उत्तरी गोवा: एक मंदिर उत्सव के दौरान मची भगदड़ में कम से कम छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
  • 08 जनवरी, 2025: तिरुपति, आंध्र प्रदेश: तिरुमाला मंदिर में वैकुंठ एकादशी उत्सव के लिए टिकट लेने के लिए उमड़ी भीड़ में धक्का-मुक्की हुई और भगदड़ मच गई, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • 12 अगस्त, 2024: जहानाबाद, बिहार: मखदुमपुर क्षेत्र में स्थित बाबा सिद्धनाथ मंदिर में भगदड़ मचने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और नौ घायल हो गए।
  • 02 जुलाई, 2024: हाथरस, उत्तर प्रदेश: यह देश के सबसे भयानक हादसों में से एक था। बाबा नारायण हरि उर्फ साकार विश्व हरि ‘भोले बाबा’ के ‘सत्संग’ के दौरान हुई भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे।
  • 31 मार्च, 2023: इंदौर, मध्य प्रदेश: रामनवमी के अवसर पर एक मंदिर में ‘हवन’ कार्यक्रम के दौरान एक प्राचीन ‘बावड़ी’ (कुएं) के ऊपर बनी स्लैब ढह गई, जिसमें 36 लोग समा गए।
  • 01 जनवरी, 2022: कटरा, जम्मू-कश्मीर: नए साल के दिन प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से ज्यादा घायल हो गए।
  • 14 जुलाई, 2015: राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश: ‘पुष्करम’ उत्सव के दौरान गोदावरी नदी के तट पर एक प्रमुख स्नान घाट पर भगदड़ मचने से 27 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई।
  • 03 अक्टूबर, 2014: पटना, बिहार: दशहरा समारोह के बाद पटना के गांधी मैदान में मची भगदड़ में 32 लोग मारे गए और 26 घायल हुए।
  • 13 अक्टूबर, 2013: दतिया, मध्य प्रदेश: रतनगढ़ मंदिर के पास नवरात्रि उत्सव के दौरान नदी के पुल के टूटने की अफवाह से मची भगदड़ में 115 लोग मारे गए और 100 से ज़्यादा घायल हो गए।
  • 19 नवंबर, 2012: पटना, बिहार: छठ पूजा के दौरान गंगा नदी के किनारे एक अस्थायी पुल के ढह जाने से मची भगदड़ में करीब 20 लोग मारे गए।
  • 14 जनवरी, 2011: सबरीमाला, केरल: मकर संक्रांति के दिन सबरीमाला मंदिर में भगदड़ मचने से 106 तीर्थयात्री मारे गए।
  • 04 मार्च, 2010: प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश: कृपालु महाराज के आश्रम में मुफ्त कपड़े और भोजन लेने के लिए जमा हुई भीड़ में भगदड़ मचने से लगभग 63 लोगों की मौत हो गई।
  • 30 सितंबर, 2008: जोधपुर, राजस्थान: चामुंडा देवी मंदिर में बम विस्फोट की अफवाह फैलने के बाद मची भगदड़ में लगभग 250 श्रद्धालु मारे गए।
  • 03 अगस्त, 2008: बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश: नैना देवी मंदिर में चट्टान गिरने की अफवाह ने भगदड़ का रूप ले लिया, जिसमें 162 लोग मारे गए।
  • 25 जनवरी, 2005: सतारा, महाराष्ट्र: मंधारदेवी मंदिर में वार्षिक तीर्थयात्रा के दौरान सीढ़ियों पर फिसलने से हुई भगदड़ में 340 से ज़्यादा श्रद्धालु कुचलकर मारे गए।
  • 27 अगस्त, 2003: नासिक, महाराष्ट्र: कुंभ मेले में पवित्र स्नान के दौरान हुई भगदड़ में 39 लोगों की मौत हो गई और लगभग 140 घायल हो गए।

यह लिस्ट एक दुखद रिमाइंडर है कि आखिर कब हम इन हादसों से सबक लेंगे और धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को गंभीरता से लिया जाएगा ताकि आस्था की यात्रा, मातम की यात्रा न बने।