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Female Labour Force Participation : रसोई से निकलकर देश की इकोनॉमी चला रही हैं महिलाएं, 8 साल में कैसे 22% से 39% पहुंचा आंकड़ा?

Female Labour Force Participation : आज 1 मई है, यानी ‘श्रम दिवस’ (Labour Day)। जब भी हम ‘श्रम’ या मेहनत की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे

Priyanshi

Priyanshi (वरिष्ठ संवाददाता)

2 मई 2026

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Female Labour Force Participation : रसोई से निकलकर देश की इकोनॉमी चला रही हैं महिलाएं, 8 साल में कैसे 22% से 39% पहुंचा आंकड़ा?

फोटो: ग्राउंड रिपोर्ट - विशेष संवाददाता (दैनिक एक्सप्रेस)

Female Labour Force Participation : आज 1 मई है, यानी ‘श्रम दिवस’ (Labour Day)। जब भी हम ‘श्रम’ या मेहनत की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में किसी फैक्ट्री में काम करते मजदूर या खेतों में पसीना बहाते किसान की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या आपने कभी उस मेहनत के बारे में सोचा है जो हमारे घर की महिलाएं करती हैं? या उन महिलाओं के बारे में जो सुबह उठकर घर का टिफिन पैक करती हैं और फिर ऑफिस, बैंक या अपनी छोटी सी दुकान पर जाकर देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को रफ्तार देती हैं?

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आज का दिन सिर्फ कारखानों में काम करने वालों का नहीं है, बल्कि यह दिन राष्ट्र निर्माण में अपना पसीना बहाने वाली उस ‘मातृ श्रम शक्ति’ (Women Workforce) को नमन करने का भी है। पिछले कुछ सालों में भारत में काम करने वाली महिलाओं की संख्या में एक बहुत बड़ा और सुखद बदलाव आया है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि देश की नारी शक्ति ने कैसे एक नई उड़ान भरी है और आंकड़े क्या कहानी बयां कर रहे हैं।

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श्रम दिवस और हमारी ‘मातृ शक्ति’

किसी भी देश का विकास तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक उसकी आधी आबादी (महिलाएं) घरों की चारदीवारी में कैद रहे। जब एक महिला काम करने के लिए घर से बाहर निकलती है, तो वह सिर्फ दो पैसे नहीं कमाती, बल्कि वह अपने पूरे परिवार की सोच बदल देती है। वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देती है और देश की तरक्की में सीधा योगदान देती है। आज भारत जिस तेज रफ्तार से दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है, उसमें हमारी मातृ शक्ति की मेहनत का बहुत बड़ा हाथ है।

क्या कहते हैं आंकड़े? (22% से 39% तक का शानदार सफर)

अक्सर हम बातों पर तब यकीन करते हैं जब हमारे सामने ठोस आंकड़े (Data) हों। तो चलिए, आपको रोजगार के कुछ ऐसे आंकड़े बताते हैं जो आपको सच में गर्व महसूस कराएंगे।

भारत में महिलाओं की ‘श्रम बल भागीदारी दर’ (Female Labour Force Participation Rate) को लेकर सरकार ने हाल ही में आंकड़े जारी किए हैं।

  • साल 2017 का हाल: आज से कुछ साल पहले, साल 2017 में भारत में काम करने वाली या काम की तलाश करने वाली महिलाओं का आंकड़ा सिर्फ 22 प्रतिशत था। यानी हर 100 में से सिर्फ 22 महिलाएं ही कामकाज से जुड़ी थीं।

  • साल 2025 की शानदार छलांग: लेकिन आपको जानकर खुशी होगी कि साल 2025 तक आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर 39 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

महज 8 सालों के अंदर 22% से 39% तक पहुंचना कोई छोटी बात नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि अब पहले से कहीं ज्यादा महिलाएं नौकरी कर रही हैं, अपना बिजनेस चला रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

कैसे आया यह बड़ा बदलाव? (सरकारी योजनाओं का असर)

अब सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं ने काम करना शुरू कर दिया? इसके पीछे सरकार की कुछ दूरदर्शी और मजबूत नीतियां (Visionary Policies) रही हैं।

  1. मुद्रा योजना का कमाल: पहले महिलाओं को अपना छोटा-मोटा काम (जैसे बुटीक, सिलाई सेंटर या टिफिन सर्विस) शुरू करने के लिए लोन नहीं मिलता था। ‘मुद्रा योजना’ ने बिना गारंटी के लोन देकर लाखों महिलाओं को खुद का बॉस बना दिया।

  2. मैटरनिटी लीव (Maternity Leave): एक समय था जब बच्चा होने पर महिलाओं को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती थी। लेकिन सरकार ने मैटरनिटी लीव को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया। इससे महिलाएं मां बनने के बाद भी अपनी नौकरी आराम से जारी रख पा रही हैं।

  3. सुरक्षा और शिफ्ट के नियम: सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कड़े नियम बनाए और उन्हें नाइट शिफ्ट में भी सुरक्षित तरीके से काम करने की छूट दी, जिससे आईटी (IT) और सर्विस सेक्टर में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।

  4. स्वयं सहायता समूह (SHG): गांव-देहात में लाखों महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जिससे वे अचार-पापड़ बनाने से लेकर बैंकिंग के काम तक कर रही हैं।

गांव से लेकर शहर तक: कैसे बदल रही है तस्वीर?

यह 39 प्रतिशत का आंकड़ा सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों का नहीं है। आज आप किसी भी सरकारी ऑफिस में जाएं, वहां आपको महिला कर्मचारी दिखेंगी। बैंकों में, अस्पतालों में (नर्स और डॉक्टर के रूप में), और यहां तक कि सेना और पुलिस में भी बेटियां मोर्चे पर खड़ी हैं।

दूसरी तरफ, गांवों में भी बदलाव साफ दिख रहा है। खेती-किसानी से लेकर पशुपालन तक में महिलाओं की भागीदारी का अब आधिकारिक तौर पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है। यही वजह है कि आज भारत की नारी शक्ति देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।

मजदूर दिवस के मौके पर हमें यह याद रखना चाहिए कि किसी भी देश की तरक्की की चाबी उसकी महिलाओं के हाथ में होती है। 22% से 39% तक का यह सफर एक बहुत बड़ी जीत है, लेकिन हमारा लक्ष्य इसे 50% से भी ऊपर लेकर जाना होना चाहिए। जब परिवार, समाज और सरकार मिलकर महिलाओं को आगे बढ़ने का सुरक्षित माहौल देंगे, तो भारत को ‘सुपरपावर’ बनने से कोई नहीं रोक सकता। इस श्रम दिवस पर हर उस कामकाजी महिला को सलाम, जो अपने घर और देश दोनों को मजबूती से संभाल रही है…


“छात्रों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं पर कठोरतम प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

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