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सिद्धू मूसेवाला की मां को बच्चा पैदा करने पर सरकार का नोटिस, जानिए पूरा मामला

डेस्क। Maximum Age To Have a Child Through IVF : दिवंगत पंजाब सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर के बच्चे के जन्म देने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पंजाब सरकार को 14 मार्च को एक पत्र भेजा था और चरण कौर के आईवीएफ उपचार के संबंध में एक रिपोर्ट की मांग करी है।

दरअसल अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद मूसेवाला के माता-पिता ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के लिए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक का सहारा लिया था।

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दिवंगत पंजाब सिंगर सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moose wala) की मां चरण कौर (Charan Kaur) ने पिछले दिनों 58 साल की उम्र में एक बेटे को जन्म दिया था और यह खबर कई लोगों के लिए काफी हैरान करने वाली थी। दरअसल अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद मूसेवाला के माता-पिता ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के लिए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (In-Vitro Fertilization, आईवीएफ) का भी सहारा लिया था। सिद्धू मूसेवाला की 29 मई 2022 को पंजाब के मनसा जिले में हत्या कर दी गई थी और उस समय उनकी उम्र केवल 28 साल की थी।

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लेकिन अब चरण कौर के बच्चे के जन्म देने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पंजाब सरकार को 14 मार्च को एक पत्र भी भेजा और चरण कौर के आईवीएफ उपचार के संबंध में एक रिपोर्ट की मांग करी है। 

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बता दें स्वास्थ्य मंत्रालय ने पंजाब सरकार को भेजी चिट्ठी में बोला है कि, ‘सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम-2021 की धारा 21 (जी) के तहत, एआरटी सेवाओं के तहत जाने वाली महिला के लिए निर्धारित आयु सीमा 21-50 वर्ष के बीच की है। इसलिए, आपसे अनुरोध है कि आप इस मामले को देखें और एआरटी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अनुसार इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी विभाग को सौंपें।’ 

50 साल की उम्र है निर्धारित स्वास्थ्य  मंत्रालय ने चरण कौर की उम्र को चिह्नित करते हुए बोला है कि सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) सेवाएं लेने वाली महिला के लिए आयु सीमा 21 से 50 वर्ष के बीच की होती है। पर मूसेवाला के पिता बलकौर की उम्र करीब 60 साल की है।

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 सीडीसी (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) के अनुसार, 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) चक्रों का औसत प्रतिशत जो जीवित जन्म का कारण बनता है, 31 फीसदी का है। 35 से 37 वर्ष की महिलाओं में यह 24 फीसदी का है। वहीं 38 से 40 वर्ष की महिलाओं में यह बस 16 फीसदी है।

सिद्धू मूसेवाला की मां के मामले ने बुजुर्ग महिलाओं में स्वास्थ्य जोखिमों, सामाजिक प्रभावों और आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) की नैतिक सीमाओं के नैतिक विचारों के बारे में बहस भी छेड़ दी है। साथ ही 25 दिसंबर 2021 को पारित भारत के एआरटी कानून ने आईवीएफ से गुजरने वाली महिला की आयु को 50 वर्ष तक सीमित भी कर दिया है। यह उस उम्र में गर्भावस्था के पेशेवरों का एक स्वागत योग्य कदम रहा था।

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