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Join NowMalaria in pregnancy: प्रेगनेंसी (Pregnancy) किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत लेकिन सबसे नाजुक समय होता है। इस दौरान एक मां को अपने साथ-साथ अपने होने वाले बच्चे का भी ख्याल रखना पड़ता है। हम अक्सर खान-पान और विटामिन्स पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर के आस-पास मंडराने वाला एक छोटा सा मच्छर भी मां और बच्चे दोनों के लिए कितनी बड़ी मुसीबत ला सकता है?
जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘मलेरिया’ (Malaria) की। एक आम इंसान को भी मलेरिया बुरी तरह तोड़ कर रख देता है, लेकिन अगर यह किसी गर्भवती महिला को हो जाए, तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है। आज हम बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि प्रेगनेंसी में मलेरिया होने पर क्या-क्या खतरे होते हैं, इससे प्रीमैच्योर डिलीवरी का रिस्क कैसे बढ़ता है और आप खुद को इससे कैसे बचा सकती हैं।
प्रेगनेंसी में मलेरिया आम लोगों से ज्यादा खतरनाक क्यों है?
शायद आप सोचें कि मलेरिया तो किसी को भी हो सकता है, तो प्रेगनेंसी में यह इतना खास मुद्दा क्यों है? दरअसल, जब कोई महिला गर्भवती होती है, तो उसके शरीर का इम्यून सिस्टम (Immune System) यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत थोड़ी कम हो जाती है। शरीर का पूरा फोकस बच्चे को सुरक्षित रखने पर होता है।
इस वजह से, गर्भवती महिलाओं को आम लोगों के मुकाबले मलेरिया का इंफेक्शन बहुत जल्दी पकड़ लेता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि मलेरिया फैलाने वाला पैरासाइट (Parasite) सीधा मां के ‘प्लेसेंटा’ (गर्भनाल) में जाकर जमा होने लगता है। प्लेसेंटा वही नली है जिससे बच्चे को खाना और ऑक्सीजन मिलती है।
गर्भ में पल रहे बच्चे और मां पर क्या होता है असर?
अगर सही समय पर मलेरिया का इलाज न हो, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसके मुख्य खतरे इस प्रकार हैं:
1. समय से पहले डिलीवरी (Premature Delivery):
मलेरिया का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसकी वजह से महिला को समय से पहले लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) शुरू हो सकता है। ऐसे में बच्चा 9 महीने पूरे होने से पहले ही पैदा हो जाता है (प्रीमैच्योर डिलीवरी)। ऐसे बच्चों के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते, जिससे उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
2. बच्चे का वजन कम होना (Low Birth Weight):
चूंकि मलेरिया का पैरासाइट प्लेसेंटा में जमा हो जाता है, इसलिए बच्चे तक सही मात्रा में खून और पोषण नहीं पहुंच पाता। इसकी वजह से जन्म के समय बच्चे का वजन सामान्य से बहुत कम रह जाता है।
3. मां में खून की भारी कमी (Severe Anemia):
मलेरिया हमारे शरीर के रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाओं) को तेजी से नष्ट करता है। प्रेगनेंसी में महिलाओं को पहले से ही ज्यादा खून की जरूरत होती है। ऐसे में मलेरिया होने पर मां के शरीर में खून की भारी कमी (Anemia) हो जाती है, जो डिलीवरी के वक्त जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रेगनेंसी में मलेरिया के लक्षण, जिन्हें बिल्कुल इग्नोर न करें
गर्भावस्था के दौरान कई बार महिलाएं थकान या हल्के बुखार को नॉर्मल समझकर इग्नोर कर देती हैं। लेकिन अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं:
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अचानक बहुत तेज बुखार आना।
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बुखार के साथ कंपकंपी (सर्द लगकर बुखार आना)।
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बुखार उतरते ही बहुत ज्यादा पसीना आना।
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भयंकर सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द होना।
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उल्टी या जी मिचलाना।
चेतावनी: प्रेगनेंसी में खुद से पैरासिटामोल या कोई भी बुखार की दवाई न लें। यह बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है।
मच्छरों से कैसे बचें? (अपनाएं ये आसान उपाय)
कहा जाता है कि ‘इलाज से बेहतर बचाव है’ (Prevention is better than cure)। इसलिए मच्छरों से बचने के लिए ये सावधानियां जरूर बरतें:
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मच्छरदानी का इस्तेमाल करें: रात को सोते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी की मच्छरदानी लगाकर सोएं। यह सबसे सेफ और असरदार तरीका है।
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पूरी बांह के कपड़े पहनें: शाम के वक्त पार्क या छत पर जाते समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें ताकि मच्छर काट न सकें।
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पानी इकट्ठा न होने दें: मलेरिया के मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपते हैं। अपने घर के गमलों, कूलर या आसपास कहीं भी पानी इकट्ठा न होने दें।
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सेफ मॉस्किटो रेपेलेंट: प्रेगनेंसी में केमिकल वाली कॉइल या स्प्रे का धुआं नुकसान कर सकता है। इसलिए डॉक्टर से पूछकर किसी सेफ मॉस्किटो क्रीम (Repellent) का इस्तेमाल करें।
प्रेगनेंसी एक ऐसा समय है जब छोटी सी लापरवाही भी बड़ा रूप ले सकती है। मलेरिया कोई आम बुखार नहीं है। अगर आप या आपके घर में कोई महिला गर्भवती है, तो मच्छरों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। अगर हल्का सा भी बुखार या कंपकंपी महसूस हो, तो घरेलू नुस्खों में वक्त बर्बाद करने के बजाय तुरंत अपने गायनेकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से संपर्क करें। सही समय पर इलाज ही मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रख सकता है।















