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Join NowPM Modi Agriculture Reforms: जब आप सुबह की शुरुआत एक गर्मागर्म कॉफी के प्याले के साथ करते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि भारत की पहाड़ियों में उगने वाली यह कॉफी आज दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स को टक्कर दे रही है? जी हां, भारतीय कॉफी अब केवल एक पेय नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक बन चुकी है।
शून्य से शिखर तक: एक जादुई सफर
आंकड़े गवाह हैं कि पिछले एक दशक में भारतीय कॉफी ने जो छलांग लगाई है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। साल 2013-14 में जहां भारत का कॉफी निर्यात महज
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2.13 बिलियन (लगभग ₹17,500 करोड़) के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। यह केवल व्यापारिक वृद्धि नहीं, बल्कि भारतीय किसानों के पसीने और सही नीतियों का मधुर परिणाम है।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन और कृषि निर्यात नीति (2018)
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की दूरदर्शी नीतियां हैं। 2018 में लागू की गई कृषि निर्यात नीति (Agriculture Export Policy) ने भारतीय कॉफी के लिए वैश्विक बाजारों के बंद दरवाजे खोल दिए। सरकार ने न केवल निर्यात के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत किया, बल्कि लॉजिस्टिक्स को भी इतना सुगम बना दिया कि कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के बागानों से निकली कॉफी कुछ ही दिनों में यूरोप और अमेरिका के कैफे तक पहुंचने लगी।
GI टैग: भारतीय कॉफी की ‘रॉयल’ पहचान
भारत की 5 प्रमुख कॉफी किस्मों को जीआई टैग (Geographical Indication) मिलना एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हुआ। इसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कॉफी को एक ‘प्रीमियम ब्रांड’ के रूप में स्थापित कर दिया। अब विदेशी खरीदार जानते हैं कि अगर कॉफी पर भारत का ठप्पा है, तो उसकी गुणवत्ता और स्वाद लाजवाब होगा।
किसानों की आय में भारी इजाफा
इस ‘कॉफी क्रांति’ का सबसे सुखद पहलू हमारे किसान भाई-बहन हैं। बेहतर वैश्विक कीमतों और सीधे बाजार तक पहुंच मिलने से किसानों की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। बिचौलियों का प्रभाव कम हुआ है और डिजिटल ब्रांडिंग के जरिए छोटे बागान मालिकों को भी अपनी फसल की सही कीमत मिल रही है।
प्रीमियम क्वालिटी और ग्लोबल ब्रांडिंग
आज भारत केवल कच्ची कॉफी बीन्स का निर्यातक नहीं रहा, बल्कि हम अब प्रीमियम रोस्टेड कॉफी और स्पेशलिटी कॉफी के क्षेत्र में भी अपनी धाक जमा रहे हैं। दुनिया भर के कॉफी प्रेमी अब ‘इंडियन अरेबिका’ और ‘रोबस्टा’ की विशिष्टता को पहचान रहे हैं।
कर्नाटक के कूर्ग से लेकर तमिलनाडु की नीलगिरी की पहाड़ियों तक, भारतीय कॉफी की महक अब सात समंदर पार तक फैल चुकी है। $2.13 बिलियन का यह लक्ष्य महज एक पड़ाव है, असली मंजिल तो भारतीय कॉफी को दुनिया का नंबर वन ब्रांड बनाना है। यह #NayeBharatKiNayiPehchan है, जहाँ हमारी पारंपरिक फसलें अब ग्लोबल सुपरस्टार बन रही हैं।









