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Join NowCM Rekha Gupta: कोरोना महामारी का वह काला दौर शायद ही कोई भूल पाए। जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब कुछ जांबाज अपनी जान की परवाह किए बिना सड़कों और अस्पतालों में मौत से लड़ रहे थे। इनमें से कई ‘कर्मयोगियों’ ने सेवा करते-करते अपने प्राणों की आहुति दे दी। वर्षों तक इन शहीदों के परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने उन परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है।
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भावुक मुलाकात और 1 करोड़ की सम्मान राशि
हाल ही में एक भावुक कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन छह फ्रंटलाइन वर्कर्स के परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने कोरोना काल में सर्वोच्च बलिदान दिया था। मुख्यमंत्री ने न केवल उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि लंबे समय से लंबित 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता के चेक भी सौंपे।
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इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, “यह एक करोड़ रुपये की राशि उन परिवारों की ‘अपूर्णीय क्षति’ की भरपाई तो नहीं कर सकती, लेकिन यह सरकार का एक छोटा सा प्रयास है यह बताने का कि दिल्ली अपने वीरों के साथ खड़ी है।”
ASI राधे श्याम: एक वीर की कहानी
सहायता पाने वालों में दिल्ली पुलिस ट्रैफिक यूनिट के एएसआई राधे श्याम का परिवार भी शामिल था। राधे श्याम ने लॉकडाउन के दौरान अपनी ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाई थी। उनके परिवार को चेक सौंपते समय माहौल काफी गमगीन हो गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राधे श्याम जैसे वीरों का बलिदान सदैव स्मरण में रहेगा और उनका परिवार अब अकेला नहीं है।
पिछली सरकार की देरी और नया संकल्प
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस दौरान पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई देरी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि कई परिवारों को प्रक्रियागत उलझनों और फाइलों के इधर-उधर होने के कारण वर्षों तक इंतज़ार करना पड़ा।
रेखा गुप्ता ने भरोसा दिलाया, “अब समय बदल गया है। हमारी सरकार ‘सम्मान, संवेदना और संकल्प’ के सिद्धांत पर चलती है। ऐसे संवेदनशील मामलों को अब ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर रखा जा रहा है ताकि किसी भी पात्र परिवार को अपने हक के लिए भटकना न पड़े।”
विभिन्न विभागों के ‘मौन नायक’
जिन छह परिवारों को यह सहायता दी गई, वे अलग-अलग सरकारी विभागों से जुड़े थे:
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MCD और NDMC: सफाई कर्मचारी जो शहर को संक्रमण मुक्त रख रहे थे।
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DTC: बस ड्राइवर और कंडक्टर जिन्होंने जरूरी सेवाओं के लिए परिवहन सुनिश्चित किया।
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दिल्ली जल बोर्ड: वे कर्मचारी जिन्होंने लॉकडाउन में पानी की सप्लाई रुकने नहीं दी।
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स्वास्थ्य विभाग (MAMC & Spinal Injury Center): पैरामेडिकल स्टाफ जिन्होंने सीधे मरीजों के बीच रहकर जंग लड़ी।
एक नई उम्मीद की किरण
मुख्यमंत्री का यह कदम केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक नैतिक जीत है जो अपनों को खोने के बाद सिस्टम से लड़ रहे थे। रेखा गुप्ता के इस ‘ह्यूमन टच’ ने दिल्ली प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को फिर से जगाया है। दिल्ली के इन कर्मयोगियों का बलिदान अब कागजों में नहीं, बल्कि सरकार के संकल्पों में जीवित रहेगा।









