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Join NowIMF Warns China: आज पूरी दुनिया की नजरें चीन की डगमगाती अर्थव्यवस्था पर टिकी हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चीन को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट जारी की है, जिसने न केवल बीजिंग की नींद उड़ा दी है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी खलबली मचा दी है। IMF ने “ड्रैगन” की आर्थिक नीतियों (China Economic Policies) की धज्जियां उड़ाते हुए साफ लफ्जों में कहा है कि चीन की मौजूदा जिद न केवल उसके अपने लिए आत्मघाती साबित हो रही है, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को गर्त में धकेल रही है।
आखिर क्यों भड़का IMF? जानिए पूरी कहानी
ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 18 फरवरी को आईएमएफ के कार्यकारी निदेशकों ने चीनी अर्थव्यवस्था (China Economy) की वार्षिक समीक्षा की। इस बैठक के बाद जो बयान सामने आया, वह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। आईएमएफ ने चीन के ‘चालू खाता अधिशेष’ (Current Account Surplus) पर कड़ा ऐतराज जताया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन का निर्यात (Export) रिकॉर्ड 73% की दर से बढ़ा है, जो सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन इसकी हकीकत बहुत डरावनी है। अपनी मुद्रा ‘युआन’ (Renminbi) की कीमत को गिराकर चीन अपने सामान को दुनिया भर में सस्ता बेच रहा है। इससे उसके बिजनेस पार्टनर्स को भारी नुकसान हो रहा है, जबकि चीन के अंदर घरेलू मांग पूरी तरह दम तोड़ चुकी है।
डिफ्लेशन का खतरा और कमजोर घरेलू बाजार
चीन के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह सिर्फ बाहर माल बेचने पर ध्यान दे रहा है, लेकिन अपने ही देश के लोगों की जेब में पैसा नहीं डाल रहा है। आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि चीन में ‘डिफ्लेशन’ (Deflation) यानी कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है, जो किसी भी देश के लिए मंदी का सबसे बड़ा संकेत होता है। जब घरेलू मांग कमजोर होती है और आयात (Import) घट जाता है, तो अर्थव्यवस्था अंदर से खोखली होने लगती है।
गोल्डमैन सैक्स ने भी बजाई थी खतरे की घंटी
यह पहली बार नहीं है जब चीन को ऐसी फटकार मिली है। दिग्गज वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के अर्थशास्त्री भी पिछले साल नवंबर में यह चेतावनी दे चुके थे। उन्होंने साफ कहा था कि चीन की बढ़ती निर्यात क्षमता बाकी की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘नेगेटिव इम्पैक्ट’ पैदा कर रही है। अब आईएमएफ ने भी इस बात पर मुहर लगा दी है कि चीन अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय दुनिया को नुकसान पहुंचा रहा है।
जीडीपी की रफ्तार में आएगी भारी गिरावट!
साल 2025 में चीन ने 5% की विकास दर हासिल करने का दावा किया था, लेकिन अब भविष्य धुंधला नजर आ रहा है। आईएमएफ का अनुमान है कि 2025-26 के दौरान चीन की जीडीपी (China GDP Growth Rate) गिरकर 4.5% पर आ जाएगी। कई विशेषज्ञ तो यहाँ तक मान रहे हैं कि अगले साल के लिए चीन को अपना लक्ष्य और भी कम करना पड़ सकता है। यह गिरावट न केवल चीन बल्कि उन सभी देशों के लिए बुरी खबर है जो चीनी सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।
IMF की चीन को खरी-खरी सलाह
आईएमएफ ने चीन को ‘इगो’ छोड़कर सुधारों पर ध्यान देने को कहा है। सलाह दी गई है कि बीजिंग को अब ‘निर्यात-आधारित मॉडल’ को छोड़कर ‘घरेलू उपभोक्ता खर्च’ (Domestic Consumer Spending) पर ध्यान देना चाहिए। यानी, चीन को अपने नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ानी होगी ताकि उसकी अर्थव्यवस्था बाहरी दुनिया के बजाय अपने दम पर चल सके।
हालाँकि, हमेशा की तरह चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आईएमएफ बोर्ड में चीन के प्रतिनिधि झांग झेंगक्सिन का कहना है कि चीन का एक्सपोर्ट उसकी ‘इनोवेशन क्षमता’ की वजह से बढ़ रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल इनोवेशन के नाम पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को खतरे में डालना सही है?










