Most Responsible Countries : भारत ने अमेरिका-चीन को बुरी तरह पछाड़ा, जानें कौन है दुनिया का सबसे ‘ईमानदार’ देश?

Published On: February 4, 2026
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Most Responsible Countries : भारत ने अमेरिका-चीन को बुरी तरह पछाड़ा, जानें कौन है दुनिया का सबसे 'ईमानदार' देश?

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Most Responsible Countries : आज जब पूरी दुनिया राजनीतिक तनाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसे गंभीर संकटों से जूझ रही है, तब एक देश की असली पहचान उसकी ‘जिम्मेदारी’ से होती है। 19 जनवरी 2026 को वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (WIF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दुनिया के सबसे जिम्मेदार देशों की सूची (Responsible Countries List 2026) पेश की गई है। इस रिपोर्ट के नतीजे चौंकाने वाले हैं और यह साबित करते हैं कि जिम्मेदारी का मतलब केवल जीडीपी (GDP) बढ़ाना नहीं है।

JP Nadda: जगत प्रकाश नड्डा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजनीतिक वरिष्ठ नेता

सिंगापुर बना नंबर-1: छोटे देश का बड़ा धमाका

इस सूची में सिंगापुर को दुनिया का सबसे जिम्मेदार देश घोषित किया गया है। अपनी बेहतरीन शासन व्यवस्था, सुरक्षित समाज और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के कारण सिंगापुर ने पहला स्थान हासिल किया है। सूची में दूसरे स्थान पर स्विट्जरलैंड और तीसरे पर डेनमार्क रहे। इन देशों को उनके पारदर्शी प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा के बेहतरीन मॉडल के लिए सराहा गया है।

JP Nadda: जगत प्रकाश नड्डा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजनीतिक वरिष्ठ नेता

बड़ी महाशक्तियों की शर्मनाक रैंकिंग

इस रिपोर्ट की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जिम्मेदारी निभाने के मामले में काफी पीछे रह गई हैं। अमेरिका को 66वां और चीन को 68वां स्थान मिला है। यह इस बात का सबूत है कि सैन्य शक्ति या आर्थिक ताकत होने का मतलब यह नहीं है कि वह देश अपने लोगों या दुनिया के प्रति उतना ही जिम्मेदार भी है। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान इस लिस्ट में 90वें पायदान पर है।

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भारत की शानदार उपलब्धि: 16वें स्थान पर जमाया कब्जा

भारतीयों के लिए गर्व की बात यह है कि भारत ने इस सूची में 16वां स्थान हासिल किया है। 0.5515 के स्कोर के साथ भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने निम्नलिखित क्षेत्रों में शानदार सुधार किया है:

  1. स्वास्थ्य सेवाएं: देश के कोने-कोने तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाना।

  2. सामाजिक बराबरी: समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की नीतियां।

  3. पर्यावरण सुरक्षा: नेट-जीरो और अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) की दिशा में उठाए गए कदम।

  4. जन-केंद्रित नीतियां: ऐसी योजनाएं बनाना जिनका सीधा लाभ आम जनता को मिले।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि भारत को लंबे समय तक इस पायदान पर बने रहने के लिए अपने विकास और पर्यावरण नीतियों में संतुलन बनाए रखना होगा।

रैंकिंग के चार मुख्य आधार (Key Parameters)

WIF ने दुनिया के 154 देशों को केवल हवा-हवाई बातों पर नहीं, बल्कि इन चार ठोस आधारों पर परखा है:

  • साफ-सुथरा शासन: भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी एडमिनिस्ट्रेशन।

  • सामाजिक भलाई: नागरिकों का जीवन स्तर और उनकी सुरक्षा।

  • पर्यावरण की रक्षा: प्रकृति को बचाने के लिए किए गए ठोस प्रयास।

  • वैश्विक जिम्मेदारी: दुनिया की समस्याओं (जैसे गरीबी या महामारी) में दूसरे देशों की मदद करना।

संघर्ष वाले देश सबसे पीछे

जहाँ यूरोप के देश शासन और सामाजिक जिम्मेदारी में अव्वल रहे, वहीं युद्ध और गृहयुद्ध से जूझ रहे देशों की हालत सबसे खराब रही। सूची में सबसे नीचे यमन (151वां) और सीरिया (153वां) रहे।

यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो केवल अपनी तिजोरी नहीं भरते, बल्कि मानवता और पृथ्वी की रक्षा की जिम्मेदारी भी उठाते हैं। भारत की 16वीं रैंक यह दिखाती है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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