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Savitribai Phule Biography: संघर्ष के साथ की पढ़ाई और महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

इतिहास– सावित्रीबाई फुले एक ऐसी भारतीय महिला थी जिन्होंने देश की महिलाओं की स्थिति में सुधार करने हेतु निरंतर प्रयास किया। वह एक महान समाज सुधारक के साथ शिक्षाविद और महान कवियत्री के रूप में जानी जाती थी।

सावित्री बाई फुले ने अपने पति के साथ मिलकर भारत की महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और समाज मे उन्हें पुरुषों के समान बराबरी दिलाने के लिए वह निरंतर प्रयासरत रही हैं।

इसी प्रयास के चलते साल 1948 में सावित्रीबाई और उनके पति ने भिडे वाडा पुणे में पहले आधुनिक भारतीय लड़कियों के स्कूल में से एक की स्थापना की। पति के साथ वह निरंतर महिलाओं को जागरूक करती थीं और उन्हें उनके अधिकारों से परिचित करवाने का प्रवास किया।

महिलाओं के साथ भेदभाव, अनुचित व्यवहार और पितृप्रधान समाज मे महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को खत्म करने का निरंतर प्रयास किया और महिलाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रयासरत रहीं।

सावित्री बाई फुले का विवाह ज्योतिराव से हुआ था। विवाह के समय वह अनपढ़ थी। उनके पति ने खेतों में काम किया और अपने काम के साथ उन्हें शिक्षा से जोड़ा। वहीं जब वह प्राथमिक शिक्षा पूरी कर चुकी थी। तब उन्होंने आगे की पढ़ाई अपने पति के दोस्तों सखाराम यशवंत परांजपे और केशव शिवराम भावलकर से पूरी की।

उन्होंने अपने संघर्ष से अपनी पढ़ाई पूरी की ओर वह भारत की पहली महिला टीचर और प्रिंसिपल बनी। उन्होंने 1854 में काव्या फुले और 1892 में बावन काशी सुबोध रत्नाकर प्रकाशित किया, और “जाओ, शिक्षा प्राप्त करो” नामक एक कविता भी प्रकाशित की जिसमें उन्होंने शिक्षा प्राप्त करके खुद को मुक्त करने के लिए उत्पीड़ित लोगों को प्रोत्साहित किया। वहीं साबित्री बाई फुले का जन्म आज ही के दिन यानी 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में हुआ था।

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