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Join NowSP MLA Suresh Yadav: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से एक ऐसी हृदयविदारक और आक्रोश पैदा करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने लोकतंत्र और मर्यादा की सभी सीमाओं को लांघ दिया है। एक तरफ हम सीमा पर तैनात जवानों को ‘देश का गौरव’ कहते हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने ही घर में एक फौजी को महज इसलिए पीट दिया जाता है क्योंकि उसने देश के सर्वोच्च पद, यानी प्रधानमंत्री की गरिमा के लिए आवाज उठाई।
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क्या था पूरा मामला?
मामला बाराबंकी जिले का है, जहाँ समाजवादी पार्टी के कद्दावर विधायक सुरेश यादव उर्फ धर्मराज यादव (MLA Suresh Yadav) के एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंच से भाषण के दौरान देश के प्रधानमंत्री (Prime Minister) के खिलाफ कथित तौर पर बेहद अभद्र और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
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फौजी का ‘गुनाह’ बस इतना था…
वहां मौजूद भारतीय सेना के जवान विकास दीप (Vikas Deep) से अपने देश के प्रधानमंत्री के लिए ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं हुई। एक सच्चे सैनिक की तरह विकास दीप ने खड़े होकर आपत्ति जताई और कहा कि पद की गरिमा का ख्याल रखा जाना चाहिए। लेकिन, अनुशासन की बात करना सपा कार्यकर्ताओं को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं।
आरोप है कि विधायक के समर्थकों ने जवान विकास दीप को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर टूट पड़े। एक फौजी जो दुश्मनों से लोहा लेता है, उसे अपनों के बीच ही बेरहमी से पीटा गया। इस हमले में विकास दीप को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
न्याय के लिए थाने पहुँचा जवान
लहूलुहान और घायल अवस्था में जवान विकास दीप ने किसी तरह खुद को बचाया और सीधे सतरिख थाना (Satrikh Police Station) पहुँचे। उन्होंने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई और विधायक सुरेश यादव के समर्थकों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है। जवान की मांग स्पष्ट है— “देश के सम्मान के लिए लड़ने वाले के साथ अगर ऐसा व्यवहार होगा, तो कोई क्यों आवाज़ उठाएगा? आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए।”
विवादों से पुराना नाता है विधायक सुरेश यादव का
यह पहली बार नहीं है जब सपा विधायक सुरेश यादव चर्चा में आए हों। बाराबंकी की राजनीति में उन्हें अक्सर उनके विवादास्पद बयानों और उग्र व्यवहार के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार एक सैनिक के साथ हुई इस बदसलूकी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। पूर्व सैनिकों और स्थानीय नागरिकों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
राजनीति अपनी जगह है, लेकिन देश के सैनिकों और संवैधानिक पदों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। बाराबंकी की इस घटना ने प्रशासन और राजनीतिक दलों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) एक सैनिक को न्याय दिलाने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाती है।










