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Join NowRam Navami: कश्मीर घाटी की फिजाओं में इस बार की रामनवमी कुछ अलग ही संदेश लेकर आई है। श्रीनगर के ऐतिहासिक हब्बाकदल (Habba Kadal) इलाके में स्थित रघुनाथ मंदिर (Raghunath Temple) के कपाट 36 साल के लंबे अंतराल के बाद आधिकारिक तौर पर भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। 1990 के उस काले दौर के बाद, जब कश्मीरी पंडितों को अपनी जमीन छोड़नी पड़ी थी, यह मंदिर वीरान पड़ा था। लेकिन आज, इस मंदिर की घंटियों की गूंज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कश्मीर में बदलती हवाओं और आपसी भाईचारे की एक नई मिसाल पेश कर रही है।
1990 से 2024: एक मंदिर और तीन दशकों का इंतजार
वर्ष 1990 में घाटी में आतंकवाद के चरम पर पहुंचने और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद, हब्बाकदल का रघुनाथ मंदिर उपेक्षा का शिकार हो गया था। जहां कभी रामनवमी पर भक्तों का तांता लगा रहता था, वहां सन्नाटा पसर गया था। लेकिन अब 36 वर्षों बाद, झेलम नदी के किनारे बसे इस पवित्र स्थान पर फिर से रौनक लौट आई है।
श्रीनगर के डल हसन यार क्षेत्र में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम को समर्पित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि कश्मीर की उस साझा संस्कृति (कश्मीरियत) का प्रतीक भी है, जो समय के साथ धुंधली पड़ गई थी।
महाराजा गुलाब सिंह की विरासत और बेजोड़ वास्तुकला
रघुनाथ मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा गुलाब सिंह ने वर्ष 1835 में शुरू करवाया था। इसके बाद महाराजा रणबीर सिंह ने 1860 (कुछ दस्तावेजों के अनुसार 1875) में इसे पूरा किया।
यह मंदिर अपनी खास ‘शिखर शैली’ के लिए जाना जाता है, जो जम्मू के प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित है। ऊंचे शिखर और पत्थर की नक्काशी इसकी भव्यता को बयां करती है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इसका जीर्णोद्धार किया गया है, जिस पर अब तक करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
हवन कुंड तैयार, रामनवमी पर गूंजी आरती
रघुनाथ मंदिर समिति, हब्बाकदल के अध्यक्ष भारत रैना ने इस पल को भावुक क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद शुरू होने के बाद यहां ताले लग गए थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से कमेटी के सहयोग और सरकार के प्रयास से इसका नवीनीकरण किया जा रहा है।
हालांकि, अभी भी निर्माण कार्य जारी है, इसलिए विधिवत रूप से मूर्ति स्थापना तो नहीं हुई है, लेकिन भक्तों की श्रद्धा के लिए द्वार खोल दिए गए हैं। रामनवमी के शुभ अवसर पर यहां हवन कुंड तैयार किया गया और भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कश्मीर में शांति और मेल-मिलाप का नया अध्याय
भाजपा नेता और पार्टी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इसे कश्मीर के बदलते माहौल का एक बड़ा सबूत माना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर का खुलना नहीं है, बल्कि यह शांति, सौहार्द और घाटी में धीरे-धीरे लौट रही सामान्य स्थिति का प्रतीक है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की नीतियों को दिया।
यह पहल कश्मीरी पंडितों के लिए भी एक उम्मीद की किरण है, जो अपनी जड़ों की ओर लौटने का सपना देख रहे हैं। रूपा देवी स्कूल के पास स्थित इस मंदिर का खुलना यह संदेश देता है कि कश्मीर अब विकास और आपसी विश्वास की नई कहानी लिखने को तैयार है।
आस्था और विरासत का मिलन
हब्बाकदल का रघुनाथ मंदिर अब फिर से कश्मीर की सांस्कृतिक एकता की तस्वीर पेश कर रहा है। जैसे-जैसे निर्माण कार्य पूरा होगा, यह मंदिर न केवल पर्यटकों के लिए बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी एक प्रमुख केंद्र बनेगा। 36 साल बाद मंदिर के कपाट खुलना यह साबित करता है कि आस्था को दबाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता।










