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Join NowIndia GDP growth rate: चालू वित्त वर्ष (2025-26) की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों ने सारे अनुमानों को ध्वस्त करते हुए हर किसी को चौंका दिया है। जब बड़े-बड़े अर्थशास्त्री 6.7% की विकास दर का अनुमान लगा रहे थे, तब भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की अजेय बढ़त हासिल कर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज 6.5% की ग्रोथ रेट से कहीं ज्यादा है। लेकिन इस शानदार प्रदर्शन के पीछे का असली हीरो कौन है? राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़े एक ही नाम की ओर इशारा करते हैं – सर्विस सेक्टर!
असली ‘गेम चेंजर’ बना सर्विस सेक्टर!
इस बार भारतीय अर्थव्यवस्था की गाड़ी को सर्विस सेक्टर ने ही सबसे तेज रफ्तार दी है। आंकड़ों के अनुसार, इस सेक्टर ने 9.3% की अविश्वसनीय बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अर्थव्यवस्था में जान फूंकने जैसा है। सर्विस सेक्टर का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि भारत की कुल GDP में इसकी हिस्सेदारी 55% से भी अधिक है। इसका सीधा मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था में कमाए जाने वाले हर ₹100 में से ₹55 अकेले इसी सेक्टर से आते हैं। यही वजह है कि जब सर्विस सेक्टर उड़ान भरता है, तो पूरी अर्थव्यवस्था का ग्रोथ ट्रैक ही बदल जाता है।
सर्विस सेक्टर के पावरहाउस, जिन्होंने किया कमाल:
सर्विस सेक्टर कोई एक उद्योग नहीं, बल्कि कई शक्तिशाली उद्योगों का समूह है, और इस तिमाही में इन सभी ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया है:
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वित्तीय सेवाएं (Financial Services): बैंकिंग, बीमा और निवेश सेवाओं में जबरदस्त उछाल देखा गया।
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आईटी एवं बिजनेस सर्विसेज (IT & BPO): भारत के सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती दी।
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ट्रेड, होटल और रेस्टोरेंट: घरेलू और विदेशी पर्यटन में आई तेजी ने होटल इंडस्ट्री को नई जिंदगी दी।
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कम्यूनिकेशन एवं ट्रांसपोर्ट: एयरलाइंस, रेलवे और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई।
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रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाएं: प्रॉपर्टी मार्केट और कंसल्टिंग सेवाओं ने भी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
अगर पिछले साल से तुलना करें, तो यह तस्वीर और भी साफ हो जाती है। पिछले साल इसी तिमाही में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.8% थी, जिससे कुल GDP 6.5% पर अटक गई थी। लेकिन इस बार 9.3% की छलांग ने कुल जीडीपी को 7.8% के पार पहुंचा दिया।
क्यों आई सर्विस सेक्टर में ये सुनामी?
इस असाधारण प्रदर्शन के पीछे कई बड़े कारण हैं:
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डिजिटलाइजेशन की लहर: डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते चलन ने वित्तीय सेवाओं को पंख लगा दिए।
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आईटी एक्सपोर्ट्स में मजबूती: भारतीय आईटी कंपनियों की वैश्विक मांग लगातार बनी हुई है।
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पर्यटन में रिकॉर्ड वापसी: महामारी के बाद घरेलू हवाई यात्रा और पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जिससे होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा हुआ है।
कृषि सेक्टर ने भी दिया मजबूती से साथ
जहां सर्विस सेक्टर हीरो बनकर उभरा, वहीं कृषि सेक्टर ने भी एक मजबूत स्तंभ की तरह अर्थव्यवस्था को सहारा दिया। पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.7% रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज मात्र 1.5% की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। यह सुधार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की 50% से ज्यादा आबादी को रोजगार कृषि से ही मिलता है। खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), टेक्सटाइल और FMCG जैसे बड़े उद्योग सीधे तौर पर कृषि पर ही निर्भर हैं।
कैसा रहा बाकी सेक्टरों का हाल?
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मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन: इन दोनों ही क्षेत्रों ने लगभग 7.6–7.7% की ठोस वृद्धि दर्ज की, जो औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।
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खनन (Mining): यह सेक्टर निराश करता हुआ –3.1% की निगेटिव ग्रोथ के साथ घाटे में रहा।
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बिजली और पानी की सप्लाई: इन जरूरी सेवाओं में वृद्धि सिर्फ 0.5% पर सिमट कर रह गई, जो चिंता का विषय है।
कुल मिलाकर, पहली तिमाही के ये आंकड़े एक शानदार कहानी बयां करते हैं, जिसका मुख्य किरदार सर्विस सेक्टर है। यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का रास्ता सर्विस सेक्टर से होकर ही गुजरेगा।