Tamil Nadu assembly election 2026: पुडुचेरी के लग्जरी रिसॉर्ट में क्यों कैद हैं AIADMK के 47 विधायक?

Tamil Nadu assembly election 2026: भारतीय राजनीति में जब भी चुनाव के नतीजे आते हैं और किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता, तो एक शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है— ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ (Resort Politics) या बाड़ाबंदी। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद अब यह सियासी ड्रामा दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु (Tamil Nadu) में देखने को मिल रहा है।

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तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने को लेकर जबर्दस्त रस्साकशी चल रही है। किसी भी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा नहीं है। ऐसे में अपनी पार्टी को टूटने से बचाने और विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ (Poaching) के डर से मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) ने अपने 40 से ज्यादा विधायकों को पड़ोसी राज्य पुडुचेरी (Puducherry) के एक बेहद लग्जरी और 5-स्टार रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है।

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आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर तमिलनाडु में सरकार बनाने का यह पेच कहां फंसा है, एआईएडीएमके को किसका डर सता रहा है, और पुडुचेरी के इस लग्जरी रिसॉर्ट के अंदर क्या चल रहा है।

क्या है पूरा मामला? (तमिलनाडु में फिर लौटी ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’)

तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 सीटों का है। इस बार के चुनाव नतीजों ने एक ‘त्रिशंकु विधानसभा’ (Hung Assembly) की स्थिति पैदा कर दी है।

चुनावों में मशहूर अभिनेता थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की नई पार्टी टीवीके (TVK – Tamilaga Vettri Kazhagam) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वे भी 118 के आंकड़े से दूर हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। एआईएडीएमके के मुखिया एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) को डर सताने लगा कि कहीं टीवीके या दूसरी पार्टियां उनके जीते हुए नए विधायकों को लालच देकर अपनी तरफ न खींच लें। इसी डर से उन्होंने रातों-रात अपने विधायकों को बसों में भरकर पुडुचेरी भेज दिया।

पुडुचेरी का 5-स्टार रिसॉर्ट: कैसी है विधायकों की ‘कैद’?

एआईएडीएमके के कुड्डालोर, विल्लुपुरम, सलेम और अन्य जिलों के विधायक पुडुचेरी के ‘द शोर त्रिशवम’ (The Shore Trishvam) नाम के एक बेहद महंगे और शानदार बीच-साइड रिसॉर्ट में ठहराए गए हैं।

भले ही यह रिसॉर्ट अपनी प्राइवेट पूल विला, सी-फेसिंग कमरों और शानदार स्पा के लिए जाना जाता हो, लेकिन अंदर का माहौल किसी सख्त हॉस्टल जैसा है।

  • नो फोन, नो बाहरी संपर्क: सूत्रों की मानें तो पार्टी हाईकमान (EPS) ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी विधायक किसी बाहरी व्यक्ति, मीडिया या विरोधी पार्टी के नेता से बात नहीं करेगा।

  • भारी सुरक्षा व्यवस्था: पुडुचेरी पुलिस ने रिसॉर्ट के बाहर तगड़ी बैरिकेडिंग कर दी है और भारी पुलिस बल तैनात है, ताकि कोई भी अजनबी अंदर न जा सके। पार्टी के सीनियर नेता भी विधायकों पर 24 घंटे नजर रख रहे हैं [1]।

थलपति विजय की ‘TVK’ का खौफ और AIADMK की अंदरूनी कलह

आखिर एआईएडीएमके को इतना डर क्यों लग रहा है? राजनीति के जानकारों का कहना है कि पार्टी के अंदर ही एक बड़ा मतभेद (Rift) चल रहा है।

खबरें आ रही हैं कि एआईएडीएमके के कुछ विधायक और पार्टी के बड़े नेता सीवी षणमुगम (CV Shanmugam) का एक गुट चाहता है कि वे लोग थलपति विजय (TVK) का समर्थन करके सरकार में शामिल हो जाएं। इसी ‘बगावत’ को रोकने के लिए हाईकमान को बाड़ाबंदी का यह सख्त कदम उठाना पड़ा। इससे पहले जनवरी में भी पार्टी के एक बड़े नेता विजय की टीवीके में शामिल हो चुके थे, जिससे एआईएडीएमके की टेंशन और बढ़ी हुई है।

दूसरी तरफ टीवीके (TVK) ने भी की महाबलीपुरम में बाड़ाबंदी

यह मत सोचिए कि डर सिर्फ एआईएडीएमके को है। सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे चल रही अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। उन्होंने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें चेन्नई के पास महाबलीपुरम (Mamallapuram) के एक रिसॉर्ट में ठहरा दिया है। यानी तमिलनाडु की सियासत इस वक्त पूरी तरह से रिसॉर्ट्स से ही चल रही है।

आगे क्या होगा? (बहुमत का जादुई आंकड़ा 118)

तमिलनाडु की राजनीति के लिए आने वाले 24 से 48 घंटे बेहद अहम होने वाले हैं। रिसॉर्ट के बंद कमरों से लेकर दिल्ली और चेन्नई के सियासी गलियारों तक लगातार फोन खड़खड़ा रहे हैं। एआईएडीएमके के नेता एस. सेम्मलई ने साफ कहा है कि पार्टी का जो भी स्टैंड होगा, उसका अंतिम फैसला महासचिव ईपीएस (EPS) ही लेंगे।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एआईएडीएमके अपने विधायकों को टूटने से बचा पाएगी? और क्या थलपति विजय 118 विधायकों का समर्थन जुटाकर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

राजनीति में जब नंबर्स (विधायकों की संख्या) कम पड़ते हैं, तो विचारधारा पीछे छूट जाती है और ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ शुरू हो जाती है। पुडुचेरी के इस लग्जरी रिसॉर्ट में बैठे विधायक भले ही समुद्र की लहरों का मजा ले रहे हों, लेकिन उनके दिमाग में तमिलनाडु की कुर्सी का तूफ़ान चल रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि जब ये विधायक रिसॉर्ट से बाहर निकलेंगे, तो तमिलनाडु में किसकी सरकार बनेगी…


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