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अस्पताल या बीमारियों का घर? अलवर के अकबरपुर CHC के बाहर भरा ‘नरकीय’ पानी

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राजस्थान के अलवर जिले का अकबरपुर गांव इन दिनों अपनी खूबसूरती नहीं, बल्कि अपनी बदहाली के कारण चर्चा में है। विडंबना देखिए कि जिस अस्पताल (CHC – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को लोगों की बीमारियां दूर करने के लिए बनाया गया था, आज उस अस्पताल के मुख्य द्वार पर गंदे पानी और कीचड़ का ऐसा साम्राज्य है कि वहां जाना भी किसी खतरे से खाली नहीं है। अकबरपुर सीएचसी के बाहर ड्रेनेज (निकासी) की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि अस्पताल परिसर के सामने सड़क पर घुटनों तक गंदा पानी जमा है।

यह सिर्फ एक ड्रेनेज की समस्या नहीं है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की उस घोर लापरवाही का सबूत है, जो जनता की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्यों अकबरपुर की जनता इस समय ‘नरकीय’ जीवन जीने को मजबूर है।

1. मरीजों की बढ़ी मुसीबत: इलाज कराने आएं या नई बीमारी ले जाएं?

अकबरपुर सीएचसी में रोजाना अकबरपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को हो रही है। अस्पताल के गेट पर जलभराव के कारण मरीजों को घुटनों तक गंदे और बदबूदार पानी में से होकर गुजरना पड़ता है।

कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि परिजनों को मरीज को गोद में उठाकर या स्ट्रेचर को पानी के बीच से धकेलते हुए ले जाना पड़ता है। गंदे पानी के कारण संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अस्पताल अपनी बीमारी ठीक कराने आते हैं, लेकिन यहां की गंदगी देखकर लगता है कि वे साथ में मलेरिया, डेंगू या चर्म रोग (Skin Disease) जैसी नई बीमारियां घर ले जाएंगे।

2. प्रशासनिक अनदेखी: शिकायतों का ढेर, लेकिन समाधान ‘शून्य’

ग्रामीणों का आरोप है कि इस जलभराव की समस्या के बारे में उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, तहसील प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को सूचित किया है। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से चोक हो चुका है, जिसके कारण नाली का गंदा पानी सड़क पर ओवरफ्लो होकर जमा हो रहा है।

अकबरपुर की यह मुख्य सड़क है, जहां से हजारों लोगों का आना-जाना होता है। सड़क पर पानी जमा होने के कारण न केवल पैदल चलने वालों को दिक्कत हो रही है, बल्कि दोपहिया वाहन चालक भी फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का व्यापार भी इस गंदगी की वजह से ठप पड़ गया है क्योंकि दुकान के बाहर जमा गंदे पानी और बदबू के कारण ग्राहक आने से कतराते हैं।

3. महामारी की आहट: क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

अस्पताल के ठीक बाहर जमा यह गंदा पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। मानसून के दस्तक देने से पहले ही यहाँ स्थिति इतनी डरावनी है, तो बारिश के दिनों में क्या हाल होगा, यह सोचकर ही अकबरपुर के निवासी सिहर उठते हैं।

गंदे पानी में सड़ता कचरा और वहां से उठती असहनीय बदबू ने अस्पताल के स्टाफ और वहां भर्ती मरीजों का जीना मुहाल कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह के बाहर इस तरह का जलभराव ‘मेडिकल इमरजेंसी’ जैसी स्थिति है। यदि इसे तुरंत साफ नहीं कराया गया और ड्रेनेज की स्थाई व्यवस्था नहीं की गई, तो अकबरपुर में कोई बड़ी बीमारी महामारी का रूप ले सकती है।

निष्कर्ष:
अकबरपुर सीएचसी की यह तस्वीर राजस्थान सरकार के ‘निरोगी राजस्थान’ के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। जनता टैक्स देती है ताकि उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिल सकें, लेकिन अस्पताल के गेट पर गंदा पानी प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन और अलवर के जनप्रतिनिधि इस मामले में दखल दें और इस समस्या का स्थाई समाधान निकालें, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।


FAQ

1. अकबरपुर सीएचसी (CHC) के बाहर जलभराव का मुख्य कारण क्या है?
इसका मुख्य कारण खराब ड्रेनेज सिस्टम और नालियों की सफाई न होना है। नालियां चोक होने के कारण गंदा पानी सड़क पर ओवरफ्लो हो रहा है और अस्पताल के मुख्य द्वार पर जमा हो गया है।

2. इस गंदगी से मरीजों को क्या-क्या स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं?
गंदे पानी के संपर्क में आने से त्वचा संक्रमण (Skin Infection), फंगल इंफेक्शन और जलजनित बीमारियां जैसे टाइफाइड हो सकता है। साथ ही, जमा पानी में मच्छरों के कारण डेंगू और मलेरिया का खतरा भी बना रहता है।

3. क्या स्थानीय प्रशासन ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई की है?
ग्रामीणों के अनुसार, बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। केवल अस्थायी सफाई का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकला है।

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