Join WhatsApp
Join NowShivraj Singh Chouhan : लोकसभा में हाल ही में किसानों की स्थिति और उनकी आय को लेकर एक तीखी बहस देखने को मिली। सांसद एम.डी. अबू ताहेर खान ने सरकार को घेरते हुए सीधे सवाल किया कि क्या सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के अपने वादे में विफल रही है? इसके साथ ही उन्होंने पिछले पांच वर्षों में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों पर भी जवाब मांगा।
288/232: राज्यसभा में पेश होगा वक्फ संशोधन विधेयक: लोकसभा में 12 घंटे की बहस के बाद पारित
इन गंभीर सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने न केवल सरकार का बचाव किया, बल्कि आंकड़ों की ऐसी फेहरिस्त पेश की जो भारतीय कृषि की बदलती तस्वीर को बयां करती है।
बजट में 6 गुना का भारी उछाल: ₹21,000 करोड़ से ₹1.27 लाख करोड़ तक का सफर
कृषि मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार किसानों की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने एक चौंकाने वाला तुलनात्मक आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में कृषि विभाग का बजट महज 21,933.50 करोड़ रुपये था, जो अब 2025-26 के बजट अनुमान में बढ़कर 1,27,290.16 करोड़ रुपये हो गया है। बजट में यह लगभग 6 गुना की वृद्धि इस बात का सबूत है कि खेती अब सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।
UP Voter List : 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा-भाजपा में मची खलबली
क्या वाकई दोगुनी हुई आय? NSSO और ICAR के दावे
आय दोगुनी होने के सवाल पर मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ICAR ने देशभर के 75,000 ऐसे किसानों की सफलता की कहानियां संकलित की हैं, जिनकी आय सरकारी योजनाओं के सही समन्वय से दोगुनी से भी अधिक हो गई है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया:
-
औसत मासिक आय: साल 2012-13 में एक किसान परिवार की औसत मासिक आय ₹6,426 थी, जो 2018-19 के सर्वेक्षण में बढ़कर ₹10,218 हो गई है।
-
उपभोग व्यय (MPCE) में वृद्धि: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च जो 2011-12 में ₹1,430 था, वह 2023-24 में बढ़कर ₹4,122 हो गया है, जो ग्रामीण समृद्धि का संकेत है।
किसानों की मृत्यु और कर्ज का मुद्दा: NCRB की रिपोर्ट
जब बात किसानों की आत्महत्या और कर्ज की आई, तो कृषि मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु एवं आत्महत्या’ (ADSI) रिपोर्ट के माध्यम से ये आंकड़े जुटाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारें अपने नियमों के आधार पर पीड़ित परिवारों को राहत राशि (Ex-gratia) प्रदान करती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालना है।
30 मास्टर प्लान: जो बदल रहे हैं किसानों का भविष्य
कृषि मंत्री ने सदन में उन प्रमुख योजनाओं की सूची रखी, जो जमीनी स्तर पर बदलाव ला रही हैं। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत सीधे बैंक खाते में पैसा भेजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जरिए सुरक्षा कवच देना और नमो ड्रोन दीदी जैसी आधुनिक तकनीक से महिलाओं को जोड़ना शामिल है। इसके अलावा, डिजिटल कृषि मिशन और दलहन में आत्मनिर्भरता जैसे मिशन भविष्य की खेती की नींव रख रहे हैं। संसद में हुई इस चर्चा से यह साफ है कि जहां विपक्ष किसानों की समस्याओं और कर्ज को लेकर हमलावर है, वहीं सरकार अपने भारी-भरकम बजट और 30 से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं के दम पर एक ‘सफल और समृद्ध किसान’ की छवि पेश कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या ये आंकड़े हर छोटे किसान की रसोई तक पहुँच पा रहे हैं?










