Mansa Devi Temple: शिवालिक की पहाड़ियों पर साक्षात विराजमान हैं शिवपुत्री, यहाँ धागा बांधते ही पूरी होती है हर मुराद

Published On: March 19, 2026
Follow Us
Mansa Devi Temple: शिवालिक की पहाड़ियों पर साक्षात विराजमान हैं शिवपुत्री, यहाँ धागा बांधते ही पूरी होती है हर मुराद

Join WhatsApp

Join Now

Mansa Devi Temple: धर्मनगरी हरिद्वार में शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही भक्ति की अविरल धारा बह रही है। मंदिरों में घंटों की गूंज, शंखनाद और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। हरिद्वार, जिसे देवभूमि का द्वार कहा जाता है, यहाँ नवरात्र के समय एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है। भक्तों का हुजूम अपनी आराध्य मां को रिझाने और उनके दर्शन कर जीवन को धन्य बनाने के लिए उमड़ पड़ा है।

DAYALU Yojana 2026: सैनी ने एक झटके में भेजे ₹217 करोड़, क्या आपके खाते में भी आए पैसे?

शिवालिक की चोटियों पर विराजती हैं ‘मन की मुराद’ पूरी करने वाली मां
हरिद्वार की ऊंची शिवालिक पर्वतमाला पर स्थित है मां मनसा देवी का भव्य मंदिर। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है— ‘मनसा’ यानी मन की इच्छा। शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त नवरात्र के इन नौ पवित्र दिनों में सच्चे मन से मां के चरणों में शीश नवाता है, मां उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु अक्सर मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन वृक्ष पर अपनी मन्नत का धागा बांधते हैं, और जब मुराद पूरी हो जाती है, तो दोबारा आकर उसे खोलते हैं।

DAYALU Yojana 2026: सैनी ने एक झटके में भेजे ₹217 करोड़, क्या आपके खाते में भी आए पैसे?

अद्भुत है मां मनसा के प्राकट्य की कथा: ‘मन’ से हुआ था जन्म
क्या आप जानते हैं कि मां का नाम ‘मनसा’ क्यों पड़ा? पौराणिक कथाओं और पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में जब महिषासुर नामक पराक्रमी राक्षस ने देवताओं और ऋषियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पार कर दी थी, तब ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया था। देवताओं की सामूहिक प्रार्थना और उनके संकल्प से एक दिव्य शक्ति का उद्भव हुआ।

READ ALSO  Uttar Pradesh News : यूपी में बहेगी विकास की नई धारा: प्रयागराज-मिर्जापुर के बीच बनेगा 100 KM का सुपरफास्ट 6-लेन हाईवे

कहा जाता है कि मां दुर्गा के इस स्वरूप का प्राकट्य देवताओं के ‘मन’ से हुआ था। मन से अवतरित होने के कारण ही इन्हें ‘मनसा देवी’ कहा गया। मां ने ही महिषासुर के आतंक को समाप्त कर धर्म की स्थापना की थी। मंदिर समिति के अध्यक्ष महेंद्र उदयपुर के अनुसार, मां मनसा को भगवान शिव की मानस पुत्री भी माना जाता है, जो भक्तों के सभी कष्टों को हरने के लिए शिवालिक पर्वत पर विराजमान हैं।

उड़न खटोले का सफर और भक्ति का कठिन मार्ग
आज के आधुनिक समय में मां के दर्शन करना और भी सुलभ हो गया है। श्रद्धालु दो तरीकों से मां के दरबार तक पहुँचते हैं। पहला मार्ग है ‘उड़न खटोला’ (Ropeway), जो भक्तों को हवा में तैरते हुए पहाड़ों के बीच से सीधा मंदिर तक पहुँचाता है। इस सफर के दौरान नीचे बहती पतित पावनी गंगा और हरिद्वार का विहंगम दृश्य मन मोह लेता है। वहीं, दूसरा मार्ग पैदल पथ है, जहाँ भक्त पहाड़ियों की चढ़ाई करते हुए, भजन गाते हुए मां के जयकारे लगाते हुए ऊपर पहुँचते हैं।

नवरात्र में पूजा का विशेष महत्व
नवरात्र के दौरान मां मनसा देवी की आराधना करने का फल कई गुना बढ़ जाता है। यहाँ न केवल स्थानीय लोग, बल्कि देश के कोने-कोने से और विदेशों से भी श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने आते हैं। मान्यता है कि नवरात्र में मां अपने जागृत स्वरूप में होती हैं और उनके दर्शन मात्र से ही जीवन के दरिद्र और दुख दूर हो जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now