भारत में अब तक तकनीकी प्रगति की कहानी मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर कोडिंग के इर्द-गिर्द लिखी जाती रही है। लेकिन इस बार भारतीय सॉफ्टवेयर दिग्गज जोहो (Zoho) ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पूरी तरह से स्वदेशी एंटरप्राइज-ग्रेड डेटा सेंटर सर्वर ‘नाथू ला’ (Nathu La) को स्क्रैच (शुरुआत) से डिजाइन कर दिखाया है। इस सर्वर को डिजाइन करने वाली टीम में कोई सिलिकॉन वैली के अनुभवी दिग्गज नहीं, बल्कि नागपुर शहर के स्थानीय कॉलेजों से निकले बिल्कुल नए इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स शामिल हैं।
‘नाथू ला’ नाम के पीछे की कहानी
जोहो के हार्डवेयर डेवलपमेंट प्रमुख मंगेश सदाफले कुछ साल पहले अपने परिवार के साथ सिक्किम की यात्रा पर गए थे, जहां खराब मौसम के कारण वह प्रसिद्ध नाथू ला दर्रे (Nathu La Pass) को पार नहीं कर पाए थे। बाद में जब उन्हें एक स्वदेशी एंटरप्राइज सर्वर को डिजाइन करने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने इस परियोजना का नाम ‘नाथू ला’ रखने का प्रस्ताव रखा। टीम ने इस पर सहमति जताई। स्थानीय पहचान को बनाए रखने के लिए नाम से ‘पास’ (Pass) शब्द को हटा दिया गया, क्योंकि ‘ला’ और ‘पास’ दोनों का अर्थ एक ही होता है। इस तरह इस स्वदेशी सर्वर का नाम केवल ‘नाथू ला’ रखा गया।
जोहो ने इस सर्वर के अनुसंधान और विकास (R&D) की शुरुआत लगभग पांच साल पहले की थी। जोहो के एआई रिसर्च डायरेक्टर रामप्रकाश रामामोर्थी के अनुसार, वर्तमान समय में सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए सर्वर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत (Inference Cost) तेजी से बढ़ रही है। पिछले छह महीनों में वैश्विक स्तर पर कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसके कारण जेनेरिक सर्वरों की कीमतें दिसंबर 2025 की तुलना में चार गुना तक बढ़ गई हैं। इस भारी खर्च और विदेशी क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भरता को कम करने के लिए जोहो ने अपना खुद का फाउंडेशन (बुनियाद) मजबूत करने का निर्णय लिया।
भारत का बढ़ता आयात बिल और स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP)
भारत के लिए कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर का आयात तीसरा सबसे बड़ा व्यापार घाटा है, जो सोने के आयात बिल के बेहद करीब पहुंच चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने 13 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के कंप्यूटर सिस्टम का आयात किया, जबकि इसी दौरान चीन ने 150 बिलियन डॉलर से अधिक के कंप्यूटर हार्डवेयर का निर्यात किया।
मंगेश सदाफले ने बताया कि जब भारतीय कंपनियां विदेशी सर्वर खरीदती हैं, तो पैसा भारत से बाहर चला जाता है। ऐसे में देश के भीतर बौद्धिक संपदा (IP) और डिजाइन तैयार करना बेहद जरूरी है ताकि पैसे के इस बहाव को रोका जा सके। उन्होंने मोबाइल फोन असेंबलिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पास ठोस स्वदेशी मोबाइल आईपी और डिजाइन न होने के कारण भारी रॉयल्टी बाहर भेजनी पड़ती है। गहरे तकनीकी ज्ञान (Deep tech knowledge) को लाइसेंस पर नहीं लिया जा सकता, इसे घर में ही विकसित करना होता है।
नागपुर का टैलेंट और ‘सेतू’ (SETU) कार्यक्रम
जोहो ने इस परियोजना के लिए बेंगलुरु, चेन्नई या दिल्ली जैसी स्थापित तकनीकी राजधानियों के बजाय मध्य भारत के शहर नागपुर को चुना। हालांकि, नागपुर जैसे टीयर-2 शहर में एडवांस सिस्टम डिजाइन या वीएलएसआई (VLSI) इंजीनियरिंग के लिए विशेषज्ञ टैलेंट खोजना एक बड़ी चुनौती थी। इसके समाधान के लिए जोहो ने स्थानीय सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में ‘सेतू’ (SETU – Student Engagement for Transformative Upskilling) कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस कार्यक्रम के तहत जोहो छात्रों के मार्क्स या सीजीपीए के बजाय उनके सीखने की जिज्ञासा पर ध्यान केंद्रित करता है। सेतू कार्यक्रम में पांचवें सेमेस्टर से ही छात्रों को हार्डवेयर डिजाइन, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या फर्मवेयर से जुड़े बेसिक प्रोजेक्ट दिए जाते हैं। सातवें और आठवें सेमेस्टर तक ये प्रोजेक्ट और जटिल हो जाते हैं, जिसके बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को जोहो में इंटर्नशिप और नौकरी की पेशकश की जाती है। इस कार्यक्रम के जरिए अब तक 300 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया चुका है और नाथू ला सर्वर विकसित करने वाली टीम में 90 प्रतिशत नागपुर के यही स्थानीय ग्रेजुएट्स शामिल हैं।
‘नाथू ला’ सर्वर की तकनीकी विशेषताएं और पेटेंट
एक बेहतर एंटरप्राइज सर्वर को डिजाइन करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम किया गया है: मैकेनिकल डिजाइन (कूलिंग के लिए), इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन (हाई-स्पीड सिग्नल डिस्ट्रीब्यूशन के लिए) और फर्मवेयर (हार्डवेयर व ऑपरेटिंग सिस्टम को जोड़ने के लिए)।
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मॉड्यूलर आर्किटेक्चर (Open Compute ‘M-DNO’): नाथू ला की मदरबोर्ड डिजाइन पूरी तरह से मॉड्यूलर है। इसका अर्थ यह है कि विभिन्न सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन्स (जैसे जोहो मेल या जोहो मीटिंग) के लोड के अनुसार सर्वर के मॉड्यूल को आसानी से बदला जा सकता है। जोहो मेल जैसी सेवा में केवल टेक्स्ट डेटा होता है, जबकि जोहो मीटिंग में भारी बाहरी ऑडियो-वीडियो प्रोसेसिंग की जरूरत होती है। इस कस्टमाइजेशन की बदौलत यह सर्वर 12 से 18 प्रतिशत कम बिजली की खपत करता है और कुल स्वामित्व लागत (TCO) को 20 से 30 प्रतिशत तक कम कर देता है।
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कूलिंग के लिए पांच पेटेंट: सर्वर में हवा के बहाव और कूलिंग को अत्यधिक कुशल बनाने के लिए जोहो ने पांच अलग-अलग पेटेंट हासिल किए हैं।
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व्हाइट बॉक्स सॉफ्टवेयर स्टैक: विदेशी वेंडर्स के बंद पड़े कोड (Black box code) के स्थान पर, नाथू ला में ओपन-सोर्स मानकों जैसे BIOS के लिए ‘EDK2’ और बेसबोर्ड मैनेजमेंट कंट्रोलर के लिए ‘OpenBMC’ पर आधारित पूरी तरह से पारदर्शी फर्मवेयर का उपयोग किया गया है। इसमें विशेष हार्डवेयर सुरक्षा जोड़ी गई है ताकि बाहर ले जाने पर भी इसे हैक न किया जा सके।
भविष्य की योजना और रोडमैप
यह पूरा प्रोजेक्ट भारत के नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission) और आत्मनिर्भर भारत अभियान (Atmanirbhar Bharat Abhiyan) के लक्ष्यों के अनुकूल है। इस सर्वर को इंटेल के नवीनतम छठी पीढ़ी के एक्सॉन (6th Generation Xeon) प्रोसेसर पर इंटेल इंडिया के करीबी सहयोग के साथ डिजाइन किया गया है, जबकि असेंबलिंग और बौद्धिक डिजाइन पूरी तरह स्वदेशी है।
वर्तमान में, कुछ सौ नाथू ला सर्वर सीमित तौर पर जोहो के भारत-स्थित डेटा सेंटरों में तैनात हैं। कंपनी की योजना वर्ष 2026 के अंत तक अपने डेटा सेंटरों में 2,000 सक्रिय नाथू ला सर्वरों को स्थापित करने की है। क्या जोहो इन सर्वरों को बाहरी कंपनियों को बेचेगी? इस पर मंगेश सदाफले का कहना है कि वैश्विक ओईएम (OEMs) का मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क है, और जोहो ने अभी सिर्फ पहला कदम उठाया है। फिलहाल यह पूरी तरह स्थानीय स्तर पर संचालित किया जा रहा है, लेकिन भविष्य का रोडमैप बेहद मजबूत है।
FAQ:
प्रश्न 1: जोहो के स्वदेशी सर्वर का नाम ‘नाथू ला’ क्यों रखा गया?
उत्तर: जोहो के हार्डवेयर डेवलपमेंट प्रमुख मंगेश सदाफले सिक्किम की पारिवारिक यात्रा के दौरान खराब मौसम के कारण प्रसिद्ध नाथू ला दर्रे को पार नहीं कर पाए थे। जब बाद में उन्होंने इस कठिन सर्वर परियोजना पर काम शुरू किया, तो इस चुनौती को पार करने के प्रतीक के रूप में इसका नाम ‘नाथू ला’ रखा गया।
प्रश्न 2: नाथू ला सर्वर की मुख्य तकनीकी विशेषताएं और बचत क्या हैं?
उत्तर: यह सर्वर ओपन कंप्यूट ‘M-DNO’ मॉड्यूलर आर्किटेक्चर पर आधारित है जो अलग-अलग कार्यों (जैसे ईमेल या वीडियो मीटिंग) के अनुकूल ढल सकता है। इसके उपयोग से 12 से 18 प्रतिशत बिजली की बचत होती है और कुल स्वामित्व लागत (TCO) में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आती है। साथ ही इसमें एयर-कूलिंग के लिए पांच पेटेंट शामिल हैं।
प्रश्न 3: जोहो का ‘सेतू’ (SETU) कार्यक्रम क्या है और इसका इस प्रोजेक्ट से क्या संबंध है?
उत्तर: ‘सेतू’ (Student Engagement for Transformative Upskilling) जोहो का एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो नागपुर के स्थानीय सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को पांचवें सेमेस्टर से ही हार्डवेयर डिजाइन और फर्मवेयर का व्यावहारिक प्रशिक्षण देता है। नाथू ला सर्वर को बनाने वाली टीम के 90 प्रतिशत सदस्य इसी कार्यक्रम से निकले स्थानीय ग्रेजुएट्स हैं।

