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भारत की बदलती राजनीति और पीएम मोदी का तीसरा कार्यकाल

डेस्क। भारत की राजनीति में गत एक दशक के दौरान उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और इसके नेता नरेंद्र मोदी के उदय ने भारतीय राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह से बदल दिया है। नरेंद्र मोदी, जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री पद संभाला, अपने करिश्माई नेतृत्व और विकास के वादों के साथ जनता का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे। 2019 में उनके दोबारा चुने जाने के बाद, अब सवाल उठता है कि क्या मोदी तीसरा कार्यकाल भी हासिल कर पाएंगे।

भारतीय राजनीति का परिदृश्य

1990 के दशक के बाद से भारत में गठबंधन सरकारों का दौर रहा, जिसमें कई छोटे और क्षेत्रीय दलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने इस परंपरा को तोड़ा। ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘न्यू इंडिया’ के नारे के साथ मोदी ने विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, और भ्रष्टाचार मुक्त शासन को अपने प्राथमिक एजेंडा में रखा। उनकी सरकार ने जीएसटी, नोटबंदी, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया, और मेक इन इंडिया जैसे महत्वपूर्ण सुधार लागू किए।

मोदी का बढ़ता प्रभाव

मोदी का करिश्माई व्यक्तित्व, जमीनी स्तर पर व्यापक जनसंपर्क, और सोशल मीडिया का कुशल उपयोग उनकी सफलता के मुख्य कारक रहे हैं। उनकी विदेश नीति ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है, और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उनकी कड़ी नीति ने उन्हें एक सख्त नेता के रूप में प्रस्तुत किया है। भाजपा ने हिंदुत्व की विचारधारा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे उसका आधार और मजबूत हुआ।

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ

हालांकि, मोदी सरकार को कई चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। नोटबंदी और जीएसटी के कार्यान्वयन को लेकर आलोचना हुई, और इनसे उत्पन्न आर्थिक असुविधाओं ने कई लोगों को प्रभावित किया। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन, बढ़ती बेरोजगारी, और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति सरकार की नीतियों को लेकर भी सवाल उठे हैं।

तीसरा कार्यकाल: संभावनाएँ और चुनौतियाँ

मोदी का तीसरा कार्यकाल हासिल करना भाजपा के लिए एक प्रमुख लक्ष्य होगा, लेकिन इसके लिए उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। विपक्षी दलों का एकजुट होना और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाना महत्वपूर्ण होगा। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल मोदी सरकार की नीतियों और उसके कार्यान्वयन पर सवाल उठाकर जनता का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश करेंगे।

मोदी सरकार को अपने विकास के एजेंडा को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। रोजगार सृजन, कृषि क्षेत्र में सुधार, और सामाजिक समानता के मुद्दों पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा, सरकार को जनसंपर्क और संचार में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता है।

भारत की बदलती राजनीति में नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल संभावित रूप से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हो सकता है। यह भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, जनता की आकांक्षाओं, और सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा। यदि मोदी तीसरा कार्यकाल प्राप्त करते हैं, तो यह भारतीय राजनीति में उनके प्रभाव और भाजपा की संगठनात्मक शक्ति को और भी मजबूत करेगा। लेकिन इसके लिए उन्हें वर्तमान चुनौतियों का समाधान करना होगा और जनता के विश्वास को बनाए रखना होगा।

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