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Join Nowउत्तर प्रदेश के गांवों और छोटे कस्बों में आंगनबाड़ी केंद्रों की अहमियत किसी से छिपी नहीं है। यह सिर्फ बच्चों के पोषण और टीके का केंद्र नहीं, बल्कि उनकी शुरुआती शिक्षा की पहली पाठशाला भी होते हैं। इसी महत्व को समझते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों का पूरा कायाकल्प करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे लाखों बच्चों और गर्भवती माताओं का भविष्य सीधे तौर पर जुड़ा है।
हाल ही में लखनऊ में हुई एक समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अब प्रदेश का कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र किराए के या जर्जर भवन में नहीं चलेगा। सभी केंद्रों के अपने सुरक्षित और आकर्षक भवन होंगे। चलिए, इस बड़ी योजना को आसान भाषा में समझते हैं।

आखिर क्या है योगी सरकार का नया प्लान?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ हुई बैठक में साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके अपने भवनों में चलाया जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चारदीवारी खड़ी करने का मिशन नहीं है, बल्कि इन भवनों को ऐसा बनाया जाए जो बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करें।
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बाल-मित्र भवन: नए भवन सुरक्षित, आकर्षक और ‘चाइल्ड-फ्रेंडली’ (बाल-मित्र) होंगे।
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उत्कृष्ट सुविधाएं: इनमें बच्चों के पढ़ने-लिखने से लेकर खेलने-कूदने तक की बेहतरीन व्यवस्था होगी।
जिन केंद्रों के पास अभी अपना भवन नहीं है, उनके लिए सरकार ने जल्द से जल्द जमीन की पहचान कर निर्माण शुरू करने का आदेश दिया है।

सिर्फ इमारत नहीं, प्री-प्राइमरी स्कूल का मॉडल
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण केंद्र के तौर पर नहीं देख रही। सीएम योगी ने कहा कि 3 से 6 साल की उम्र के बच्चों के लिए यह केंद्र प्री-प्राइमरी स्कूल की तरह काम करेंगे।
इसका मतलब है कि अब बच्चों को यहां सिर्फ पोषण और स्वास्थ्य की जानकारी ही नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा के लिए एक मजबूत शुरुआती नींव भी दी जाएगी। इससे ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों को प्राइवेट प्ले-स्कूल जैसा माहौल सरकारी व्यवस्था में ही मिल सकेगा।

कैसे और कहाँ बनेंगे ये नए आंगनबाड़ी केंद्र?
इतनी बड़ी संख्या में नए केंद्र बनाने के लिए सरकार ने एक पूरा खाका तैयार किया है:
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पैसा कहाँ से आएगा: इन भवनों के निर्माण के लिए सरकार सीएसआर (CSR) फंड का इस्तेमाल करेगी। यानी बड़ी-बड़ी कंपनियां अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत इन केंद्रों को बनाने में मदद करेंगी। इसके अलावा, राज्य सरकार भी अपना वित्तीय सहयोग देगी।
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जल्दी और एक जैसे भवन: निर्माण में तेजी लाने के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल पर विचार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि केंद्रों के हिस्से कहीं और तैयार कर उन्हें जल्दी से असेंबल कर दिया जाएगा। इससे सभी भवन एक मानक डिजाइन के बनेंगे।
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सबसे अच्छी लोकेशन: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जहां भी संभव हो, नए आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों के कैंपस में ही बनाया जाए। इससे बच्चों को शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य जांच जैसी सभी सुविधाएं एक ही जगह मिल जाएंगी और उन्हें स्कूल जाने की आदत भी बचपन से ही पड़ जाएगी।
“स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश”: इस फैसले का क्या होगा फायदा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि ये “भावी पीढ़ी की सुदृढ़ नींव” हैं। इस बड़े फैसले से कई फायदे होंगे:
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बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ माहौल मिलेगा।
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गर्भवती और धात्री माताओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
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बच्चों की शुरुआती शिक्षा मजबूत होगी।
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स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में कमी आएगी।
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किराए पर चल रहे केंद्रों का पैसा बचेगा, जो सुविधाओं पर खर्च होगा।
सरकार का यह कदम “स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश” मिशन को नई गति देगा, जिसका लक्ष्य प्रदेश के हर बच्चे को स्वस्थ और शिक्षित बनाकर राज्य के भविष्य को मजबूत करना है।















