सोशल मीडिया पर सरकार की सख्त पकड़: आपत्तिजनक सामग्री को 3 घंटे के भीतर हटाना अब अनिवार्य

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शिकंजा कसने के लिए एक बेहद सख्त फैसला लिया है। नए सरकारी निर्देशों के तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे मेटा, एक्स, यूट्यूब) के लिए किसी भी आपत्तिजनक या अवैध सामग्री (कंटेंट) को सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसियों से निर्देश मिलने के मात्र 3 घंटे के भीतर हटाना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। देश में फर्जी खबरों, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले पोस्ट और आपत्तिजनक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।

आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए कंपनियों को मिलेगा सिर्फ 3 घंटे का समय

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए यह नया दिशानिर्देश जारी किया है। पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए 24 से 36 घंटे तक का समय मिलता था।

लेकिन नई तकनीकी चुनौतियों और इंटरनेट पर कंटेंट के तेजी से वायरल होने की रफ्तार को देखते हुए सरकार ने इस समयसीमा को घटाकर केवल 3 घंटे कर दिया है। जैसे ही किसी अधिकृत सरकारी एजेंसी या अदालत द्वारा आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर निर्देश दिया जाएगा, कंपनियों को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।

नियमों का उल्लंघन करने पर छिन जाएगी ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा

नियमों के तहत यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तय 3 घंटे की सीमा के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटाने में विफल रहता है, तो उसे गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्लेटफॉर्म आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) सुरक्षा खो देंगे।

सेफ हार्बर सुरक्षा हटने का मतलब है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी अवैध कंटेंट के लिए सीधे तौर पर कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगी। सुरक्षा हटने के बाद इन टेक कंपनियों के खिलाफ अदालतों में आपराधिक मुकदमे चलाए जा सकेंगे।

फर्जी खबरों, डीपफेक और बाल यौन शोषण पर नकेल कसने की तैयारी

सरकार के इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा करना है। हाल के दिनों में डीपफेक (Deepfake) तकनीक, बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM), देश विरोधी प्रचार, फर्जी खबरों और धार्मिक अशांति फैलाने वाले पोस्टों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक संदेश या आपत्तिजनक वीडियो चंद मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता है। ऐसे में 24 या 36 घंटे की पुरानी समयसीमा पूरी तरह से अप्रभावी साबित हो रही थी। यही वजह है कि सरकार ने अब 3 घंटे का कड़ा नियम लागू करके इन टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है।

FAQ:
Q1: भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए नया नियम क्या बनाया है?
A1: नए नियम के तहत सभी सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे मेटा, एक्स, यूट्यूब) के लिए सरकार या अधिकृत एजेंसी से आदेश मिलने के मात्र 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक या अवैध सामग्री को हटाना या ब्लॉक करना अनिवार्य कर दिया गया है।

Q2: यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तय 3 घंटे की समयसीमा में कंटेंट नहीं हटाता, तो उस पर क्या कार्रवाई होगी?
A2: नियम का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा खो देगा। इसके बाद वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी अवैध कंटेंट के लिए सीधे तौर पर कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे और उन पर मुकदमा चलाया जा सकेगा।

Q3: सरकार को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की समयसीमा को 24-36 घंटे से घटाकर 3 घंटे करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
A3: इंटरनेट पर डीपफेक, फर्जी खबरें और आपत्तिजनक वीडियो चंद मिनटों में वायरल हो जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा रहता है। पुरानी 24 या 36 घंटे की समयसीमा इसे रोकने में अप्रभावी साबित हो रही थी, इसलिए इसे घटाकर 3 घंटे किया गया है।

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