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Join NowGold price drop 2026 भारतीयों के लिए सोना (Gold) सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि एक भावना और सबसे सुरक्षित निवेश का जरिया है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से गोल्ड मार्केट से जो खबरें आ रही हैं, उन्होंने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जिस सोने ने ईरान और इजरायल के बीच जंग शुरू होने पर ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा छू लिया था, वह अब तेजी से नीचे की ओर फिसल रहा है।
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हाल ही में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव ₹1,44,825 पर बंद हुआ। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी यह 4,574 डॉलर के करीब आ गया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात वह भविष्यवाणी है, जिसमें कहा जा रहा है कि सोना ₹1,27,000 तक गिर सकता है। आखिर क्यों अचानक सोने की चमक फीकी पड़ रही है? आइए समझते हैं इसके पीछे के 5 बड़े कारण।
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1. कच्चे तेल की आग और महंगाई का डर
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से, खासकर ईरान के गैस फील्ड्स पर हमलों और जवाबी कार्रवाई ने ‘एनर्जी रिस्क’ बढ़ा दिया है। SS WealthStreet की फाउंडर सुगंधा सचदेवा के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से ‘इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) का खतरा बढ़ गया है। जब तेल महंगा होता है, तो लॉजिस्टिक्स और ईंधन की लागत बढ़ती है, जिससे हर चीज महंगी हो जाती है। ऐसे में निवेशक सोने से हाथ खींचने लगते हैं।
2. अमेरिकी डॉलर की ‘दादागिरी’
सोने और डॉलर का रिश्ता ‘सांप और नेवले’ जैसा है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोना सस्ता हो जाता है। वर्तमान में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती देखी जा रही है। दुनिया भर के निवेशक अब अपना पैसा सुरक्षित डॉलर में लगा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की डिमांड बढ़ गई है और सोने की कीमतें दबाव में आ गई हैं।
3. ब्याज दरों का ‘चक्रव्यूह’ (US Fed Policy)
अगर अमेरिका में महंगाई काबू में नहीं आती, तो वहां का केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरें बढ़ा सकता है। मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो लोग खर्च कम करते हैं और डॉलर की वैल्यू बढ़ जाती है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती सोने के भाव को नीचे धकेल देती है।
4. भारी मुनाफावसूली (Profit Booking)
जब भी सोने की कीमतें ₹1,50,000 या उससे ऊपर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचती हैं, तो बड़े निवेशक अपना मुनाफा निकालने लगते हैं। मार्केट में अचानक से सोने की सप्लाई बढ़ जाती है, जिससे कीमतें तेजी से गिरती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले हफ्ते भी यही हुआ—निवेशकों ने अपना मुनाफा वसूला और सोना ‘ओवरसोल्ड’ जोन में चला गया।
5. भारत और चीन में डिमांड में कमी
भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड कंज्यूमर हैं। जब कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाती हैं और शादियों के सीजन के बावजूद मांग में कमी आने लगती है। जब मांग (Demand) कम होती है और सप्लाई स्थिर रहती है, तो कीमतों का गिरना तय है।
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भविष्य की भविष्यवाणी: अब आगे क्या?
LKP सिक्योरिटीज के जतीन त्रिवेदी के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में सोने की ट्रेडिंग रेंज ₹1,40,000 से ₹1,47,000 के बीच रह सकती है। वहीं, सुगंधा सचदेवा का कहना है कि अगर सोना ₹1,65,000 के नीचे बना रहता है, तो यह गिरकर ₹1,35,000 और फिर ₹1,27,000 तक जा सकता है। अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी थोड़ा इंतजार करना समझदारी हो सकता है। मार्केट का माहौल फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ वाला है। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक नीतियां सोने की अगली दिशा तय करेंगी।















