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Join NowHimanta Biswa Sarma: असम की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज उम्मीदवार डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। जलुकबाड़ी (Jalukbari) विधानसभा सीट से सातवीं बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सीएम सरमा जब कामरूप (मेट्रो) डीसी कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा किसी उत्सव जैसा था। लेकिन इस नामांकन प्रक्रिया के बीच उन्होंने जो बयान दिए, उसने पूरे असम में सियासी सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है।
“आज शाम कांग्रेस का होगा सफाया”
नामांकन के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने एक ऐसा दावा किया जिसने विपक्षी खेमे में हड़कंप मचा दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज शाम को कांग्रेस के कई बड़े चेहरे और कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं।” सरमा का यह बयान उस वक्त आया है जब कांग्रेस पहले से ही असम में अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के नेताओं का बीजेपी में जाना विपक्षी गठबंधन के मनोबल को पूरी तरह तोड़ सकता है।
जब गौरव गोगोई के बयान पर दिया करारा जवाब
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने हाल ही में हिमंत बिस्वा सरमा को एक ‘संस्था’ (Institution) करार दिया था। इस पर चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर कांग्रेस पार्टी ने मुझे एक संस्था मान लिया है, तो मुझे खुशी होनी चाहिए। मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ कि वे अब किसी पार्टी से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति से लड़ रहे हैं। यह मेरी तारीफ ही है कि विरोधियों की नजर में मैं इतना बड़ा बन गया हूँ।”
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी तरफ से पूरी विनम्रता के साथ यह चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें जलुकबाड़ी के साथ-साथ पूरे असम की जनता पर पूरा भरोसा है।
हिंदू समाज को एकजुट करना ही अंतिम मिशन
अपने एजेंडे के बारे में खुलकर बात करते हुए डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर हिंदुत्व और असम की अस्मिता के मुद्दे को हवा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरा मिशन हर हिंदू व्यक्ति को बीजेपी के साथ जोड़ना है। हिंदुओं को अब बिखरना नहीं, बल्कि एक मंच पर आना चाहिए। मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि लोग कांग्रेस जैसी पार्टी में रहकर हिंदू विरोधी गतिविधियों का हिस्सा क्यों बनें? उन्हें अपने स्वाभाविक घर (BJP) में लौट आना चाहिए।” उन्होंने आगे जोड़ा कि बीजेपी का मुख्य लक्ष्य असम की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना और राज्य में विकास की गति को और तेज करना है।
असम चुनाव 2026: क्या होगा परिणाम?
हिमंत बिस्वा सरमा का सातवां चुनावी सफर शुरू हो चुका है। उनका आत्मविश्वास और कांग्रेस से लगातार हो रहा पलायन इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि बीजेपी असम में एक बार फिर बड़ी जीत की तैयारी कर चुकी है। क्या कांग्रेस शाम तक अपने कुनबे को बचा पाएगी? या फिर ‘हिमंत लहर’ में सब बह जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।










