Monday, December 5, 2022

Vikas Divyakirti की भगवान राम पर क्या थी टिप्पणी, कैसे खड़ा हुआ विवाद 

 

डेस्क। Vikas Divyakirti : आईएएस (IAS) की कोचिंग कराने वाला प्रमुख संस्थान दृष्टि आईएएस बैन हो जाना चाहिए ऐसी मांग सोशल मीडिया पर जबर्दस्त तरीके से उठाई जा रही है। वहीं इसके कोचिंग इंस्टीट्यूट के ऑनर मुख्य शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति पर भारतीय संस्कृति के अपमान का आरोप भी लगा है। दृष्टि आईएएस एक कोचिंग संस्थान है और इसमें पढ़ाने वाले विकास दिव्यकीर्ति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्वीटर पर बैन दृष्टि आईएएस (bandrishtiIAS) ट्रेंड हो रहा है। सबसे पहले हम आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो ट्रेंड कर रहा है, उसमें क्या कहा गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में विकास दिव्यकीर्ति ये कहते दिखाई दे रहे हैं कि भगवान राम ने मां सीता से कहा कि सीते तुम ज्यादा खुश मत हो मैंने तुम्हारे प्रेम के कारण तुम्हें रावण से नहीं बचाया बल्कि अपने कुल के मान की रक्षा के लिए मैंने तुम्हें बचाया है, वर्ना तुम तो रावण के हरण किए जाने के साथ ही मेरे लिए ऐसे त्याज्य हो गईं थीं जैसे कुत्ते के झूठे कर देने पर खाना त्याज्य करने योग्य हो जाता है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर ट्रेंड कराकर लोग विकास दिव्यकीर्ति पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं इसके साथ ही उनके कोचिंग सेंटर को बंद कराने की भी मांग उठ रही हैं।

पर हम बताते हैं आपको की पूरे वीडियो में दिव्यकीर्ति ने क्या कहा है और इसकी असलियत क्या है। इस वीडियो में दिव्यकीर्ति तुलसीदास की रामचरित मानस की बात करते-करते एक संस्कृत के ग्रंथ की बात करने लगते हैं। वैसे तो वह ग्रंथ का नाम नहीं लेते लेकिन कहते हैं कि संस्कृति के एक ग्रंथ में लिखा है कि भगवान राम ने मां सीता से कहा कि सीते तुम इससे ज्यादा खुश मत हो कि मैंने तुम्हारे प्रेम के कारण तुम्हें रावण से नहीं बचाया बल्कि अपने कुल के मान की रक्षा के लिए मैंने तुम्हें बचाया है। वरना तुम तो रावण के हरण किए जाने के साथ ही मेरे लिए ऐसे त्याज्य हो गईं थीं जैसे कुत्ते के झूठे कर देने पर खाना त्यागने वाला हो जाता है। वह उसके आगे कहते हैं कि इस तरह की बातें लेखकों के अपने विचार होते हैं लेकिन तुलसीदास की रामचरितमानस में ऐसा कोई भी प्रसंग नहीं है। साथ ही आगे उन्होंने वीडियो में खुद स्वीकार किया है कि उस संस्कृत ग्रंथ में जो लिखा, वह बेहद गलत है और भगवान राम के चरित्र को प्रकट नहीं करता।

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