Sunday, November 27, 2022

क्या सिर्फ झांसी के लिए लक्ष्मीबाई ने उठाई थी तलवार या भारत था उसकी जान

इतिहास– झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को उनके सामर्थ्य के लिए जाना जाता है। इतिहास बताता है कि उन्होंने अंग्रेजो के सम्मुख हार मामने से इनकार कर दिया था और उनका जमकर सामना किया। रानी लक्ष्मी बाई भारत मे महिलाओ के लिए मिशाल है। वही इनका नाम भारत के इतिहास में स्वर्ण कलम से मुद्रित है।

कई लोग कहते हैं कि रानी लक्ष्मीबाई ने भारत के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया था। लेकिन कई लोग ऐसे भी है जिन्हें यह लगता है कि रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से युद्ध सिर्फ अपनी रियासत अपनी झांसी बचाने के लिए किया था। रानी लक्ष्मीबाई ने जब अंग्रेजो से बगावत की उस युद्ध को 1857 का स्वतंत्र संग्राम कहा जाता है।लेकिन ब्रितानी इतिहासकारों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम कभी नही माना। वह कहते थे कि एक तरह की बगावत है। 

जाने लक्ष्मीबाई का सच-

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम लेते ही हमारे सामने यही छवि आती है। जिसमे एक महिला अपनी पीठ पर एक बच्चे को बांधे हाथ मे तलवार लिए घोड़े पर सवार अंग्रेजों को लहूलुहान करने के लिए खड़ी है। 

उसकी आंखों में न तो हारने का डर है न तो मौत का भय। यदि उसे कुछ दिखाई दे रहा है तो अंग्रेजों का निरंकुश व्यवहार। 

रानी लक्ष्मी बाई ने जिस बच्चे को अपनी पीठ पर बांध रखा था। वह उनका खुद का बच्चा नही था। उसे उन्होंने गोद लिया था। 20 नवंबर 1853 में गंगाधर राव ने एक बच्चे को गोद लिया. गोद लेने के दूसरे ही दिन गंगाधर राव की मौत हो गई.

गंगाधर की मौत के बाद अंग्रेजों की नजर झांसी पर थी। झांसी हथियाने के लिए लॉर्ड डलहाउज़ी की साजिश रची।उन्होंने दामोदर राव को झांसी का वारिस मानने से इंकार कर दिया था और झांसी को विलय करने का आदेश जारी कर दिया।

जब रानी लक्ष्मीबाई को यह आदेश मिला तो उन्हें स्पष्ट रूप से कहा मैं अपनी झांसी किसी को नही दूँगी। उनका यह कथन पूरे झांसी में गूंज उठा। लोगो को रानी पर विश्वास हो गया। लक्ष्मीबाई ने पहले बात चीत के माध्यम से स्थिति को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन स्थिति में कोई सुधार नही देखा तो उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए।

 लक्ष्मी बाई जब लड़ी तो क्या था विचार- 

जब माहारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह छेड़ा तब उन्होंने साफ कर दिया था। कि वह भारत के लिए मैदान में उतरी है। भारत उनका अपना देश है। वह किसी भी अंग्रेजी हुकूमत को भारत मे नहीं देखना चाहती है।

उन्होंने कई राजाओं को खत लिखे और कहा, उन्हें खुद पर बहुत भरोसा है। उन्हें लगता है वह भारत को जीत सकते हैं लेकिन अगर हम एक हुए तो हम उन्हें मात दे सकते हैं। हालाकि उस दौरान सभी भारत के राजा एकजुट नही हो पाए और अंग्रेजों ने इसका फायदा उठाया।

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