इतिहास के पन्ने

वो साबुन जिसने 100 साल से जीत रखा है लोगों का भरोसा

देश– कहते हैं ओल्ड इज गोल्ड। ववहीं भारत एक ऐसा देश है जहां अंग्रेजों के जमाने मे स्थापित किए गए व्यापार आज भी लोकप्रिय हैं और उनके प्रोडक्ट पर जनता आंख बंद करके विश्वास जताती है। 

यदि हम उस दौर की बात करें तो उस समय कोलकाता बिजनेस हब के नाम से जाना जाता था। कोई भी व्यापार यदि शुरू होता था तो वह कोलकाता से शुरू होता था। वहीं आज हम कोलकाता से शुरू हुए उस साबुन की कहानी बताने जा रहे हैं। जो बीते 100 साल से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है।

जाने कौन सा साबुन 100 साल से है लोगों की पसन्द-

असल मे हम बात कर रहे हैं मारगो साबुन की। इस साबुन का मार्केट 100 साल का हो गया है। वैसे तो बच्चे इस साबुन से नहाना बिल्कुल नहीं पसन्द करते क्योंकि इसमें नीम की कड़वाहट होती है। लेकिन परिवार का इसपर अटुट विश्वास है। क्योंकि लोगों का मानना है कि यह नीम से निर्मित साबुन है जो हमारे शरीर को वैक्टीरिया से बचाता है।

इस साबुन पर लोगों के अटुट विश्वास ने इसे एक बड़ा ब्रांड बना दिया है। आज यह साबुन Indian Superbrands Story ब्रांड के तहत निर्मित होता है। यह साबुन स्वदेशी आंदोलन की वजह से मार्केट में उतर पाया। क्योंकि उस समय लोग अंग्रेजी सामान के वहिष्कार की मांग उठा रहे थे।

मारगो साबुन का निर्माण 1916 में खगेंद्र चंद्र दास (K. C. Das) ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर कलकत्ता कैमिकल कंपनी बनाई जिसके तहत किया था। इन्होंने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से 1910 में केमिस्ट्री में डिग्री ली थी। इसके अलावा यह जापान से फार्मास्युटिकल्स की पढ़ाई करके वापस आए थे। इनका परिवारिक जुड़ाव वैध खाने से थे। 

इनकीं कम्पनी की नींव स्वदेशी आंदोलन के दौरान पड़ी और अंग्रेजी सामना के बहिष्कार और नीम के गुणों से भरपूर साबुन के दावों ने इन्हें लोकप्रिय बना दिया। वहीं इनके साबुन का नीम फॉर्मूला आज भी लोगों के दिलों में राज कर रहा है और लोग इस बीते 100 साल से इस्तेमाल कर रहे हैं।

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