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Swami Vivekananda Birth Anniversary: क्यों स्वामी विवेकानंद सभी को देते थे पढ़ने से अधिक खेलने की प्रेरणा

Swami Vivekananda Birth Anniversary: – स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणा स्रोत के रूप में विश्व भर में विख्यात हैं। उन्हें भारत का सबसे बेहतरीन मोटिवेशनल स्पीकर माना जाता है। भारत से लेकर विश्व तक उनके विचार प्रचलित हैं। 

वहीं अमेरिकी में आयोजित धर्म संसद में जब उन्होंने भाषण दिया तो भारत का सर गर्व से ऊंचा हो गया और कई मिनटों पर उनके भाषण पर संसद में तालियां बजती रहीं। यह पहली बार था जब विदेशी धरती पर हिंदी का बोलबाला था।

स्वामी विवेकानंद ने महज 25 वर्ष की आयु में मोह माया त्याग कर लोगों को प्रेरित करना आरंभ किया था। वह अपनी मां से काफी प्रभावित थे। जब स्वामी विवेकानंद उपदेश देते थे तो लोग उनके भाषण से प्रेरित होकर अपने लक्ष्य को साधने में सफल हो जाता था।

वहीं स्वामी विवेकानंद ने युवाओं से कहा था कि वह गीता पढ़ने से अधिक फुटबॉल खेलने पर फोकस करें। क्योंकि पढ़ने से अधिक आवश्यक है खेलना। वह युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होने की प्रेरणा देते थे। उनका कहना था कि यदि आप स्वयं को मजबूत बनाते हैं तो आप किसी भी लक्ष्य को आसानी से साध सकते हैं।

उन्होंने कहा, मेरा यह कथन आप लोगों को व्यथित करेगा कि गीता पढ़ने से अधिक आवश्यक है फुटबॉल खेलना। लेकिन आपको अपने जीवन के लक्ष्य को साधने के लिए शरीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए।

 

जब आप मजबूत होंगे तभी आप गीता के भाव को समझ पाएंगे। वहीं जब हम स्वयं को मजबूत मान लेंगे तो प्रत्येक लक्ष्य हासिल करना हमारे लिए आसान होगा। क्योंकि मजबूती ही सफलता का मार्ग है।

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