Waqf Amendment Bill 2025: भारत में वक्फ संशोधित विधेयक संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका है। अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस विधेयक पर अपनी स्वीकृति देंगी, यह कानून का रूप ले लेगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह कानून एकसाथ पूरे देश में तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा सकता? इस प्रक्रिया में क्या अड़चनें हैं और आगे क्या होने वाला है? आइए, विस्तार से समझते हैं।
विधेयक पास, लेकिन कानून बनने में क्यों लगेगा समय?
जब भी कोई नया कानून बनता है, तो उसे लागू करने के लिए सरकार को कई नियम और दिशानिर्देश बनाने पड़ते हैं। वक्फ संशोधन कानून भी इसी प्रक्रिया से गुजरेगा।
राष्ट्रपति की मंजूरी:
पहली औपचारिकता यह है कि राष्ट्रपति इस विधेयक को मंजूरी दें। इसके बाद सरकार एक आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी करेगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि यह कानून कब से लागू होगा।
नियम बनाने की प्रक्रिया:
वक्फ संशोधन कानून में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनके लिए नए नियमों की जरूरत होगी। ये नियम कैसे काम करेंगे, कौन अधिकारी नियुक्त होगा, सर्वेक्षण की प्रक्रिया क्या होगी – इन सभी को परिभाषित करने के लिए सरकार को अलग से गाइडलाइंस तैयार करनी होगी।
समय-सीमा और नियमों की अधिसूचना:
कानून लागू होने के बाद छह महीने के भीतर नए नियमों को तैयार करके प्रकाशित किया जाना जरूरी होगा। कुछ मामलों में यह समय सीमा बढ़ भी सकती है।
वक्फ संशोधित कानून में क्या-क्या बदलेगा?
नए कानून के तहत कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनका असर वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन पर पड़ेगा।
🔹 वक्फ बोर्ड की शक्तियां घटीं:
पहले वक्फ संपत्तियों का निर्धारण करने का अधिकार केवल वक्फ बोर्ड के पास था, लेकिन अब यह शक्ति हटा दी गई है।
🔹 अब कलेक्टर के हाथ में होगी सर्वेक्षण की जिम्मेदारी:
वक्फ संपत्तियों से जुड़े सर्वेक्षण अब कलेक्टर द्वारा कराए जाएंगे। सरकार कलेक्टर को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगी।
🔹 नए अधिकारी की नियुक्ति:
वक्फ संपत्तियों के मामलों को देखने के लिए सरकार एक नामित अधिकारी नियुक्त करेगी, जिसका कार्यकाल और अधिकार क्षेत्र स्पष्ट रूप से नियमों में बताया जाएगा।
🔹 वक्फ संपत्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया बदलेगी:
अब संपत्तियों से जुड़े आवेदन के लिए नया फॉर्मेट तैयार किया जाएगा।
नियमों को अंतिम रूप देने में कितना समय लगेगा?
6 महीने का समय:
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के पास यह जिम्मेदारी होगी कि वह 6 महीने के भीतर नियमों को तैयार करके प्रकाशित करे।
कुछ मामलों में समय सीमा बढ़ सकती है:
यदि किसी नियम को लागू करने के लिए जनता से परामर्श (Public Consultation) की जरूरत पड़ती है, तो इसके लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा।
जल्दबाजी में लागू नहीं किया जा सकता:
क्योंकि यह एक बड़ा संशोधन है, इसलिए इसे सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार हर पहलू की जांच करेगी।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इस विधेयक को लेकर विवाद भी हो रहा है। AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनका मानना है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के अधिकारों को कमजोर कर सकता है।
🔹 सांसद पप्पू यादव का भी बयान आया सामने:
उन्होंने कहा कि अगर संसद जनता की आवाज नहीं सुनती और “बहरी और गूंगी” बन जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी विकल्प बचता है।
आगे क्या होगा?
🔸 राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी।
🔸 सरकार नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
🔸 6 महीने के अंदर नए नियमों को प्रकाशित किया जाएगा।
🔸 यदि जरूरत पड़ी, तो कुछ नियमों के लिए जनता से सुझाव मांगे जाएंगे।
🔸 सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
वक्फ संशोधन कानून को लेकर कई बदलाव और प्रक्रियाएं अपनाई जानी बाकी हैं, इसलिए यह तुरंत लागू नहीं हो पाएगा। जब तक नए नियम तैयार नहीं हो जाते, तब तक इसे पूरी तरह से लागू करना मुश्किल होगा। हालांकि, सरकार इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, इस कानून का कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं। अब यह देखना होगा कि यह संशोधन आगे चलकर वक्फ संपत्तियों पर क्या प्रभाव डालता है।