Waqf amendment bill in parliament:केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक, 2024, का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में आवश्यक संशोधन करना है ताकि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित की जा सके। यह विधेयक 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास समीक्षा के लिए भेजा गया। जेपीसी ने छह महीने की विस्तृत समीक्षा के बाद 27 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें 14 संशोधनों को मंजूरी दी गई।
जेपीसी को प्राप्त संशोधन प्रस्तावों की संख्या और स्वीकृति
जेपीसी को कुल 44 संशोधन प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें से 14 संशोधनों को समिति ने स्वीकार किया, जबकि विपक्ष द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को मतदान के माध्यम से अस्वीकार कर दिया गया। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया कि इन स्वीकृत संशोधनों का उद्देश्य कानून को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।
जेपीसी की बैठकों में राजनीतिक दलों के बीच घटनाक्रम
जेपीसी की बैठकों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीव्र बहस और मतभेद देखे गए। विपक्षी सदस्यों ने समिति की कार्यवाही की आलोचना करते हुए अध्यक्ष पर “लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने” का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और समिति ने तानाशाही तरीके से काम किया। दूसरी ओर, अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी और बहुमत के आधार पर निर्णय लिए गए।
जेपीसी द्वारा स्वीकृत प्रमुख संशोधन
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‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान में बदलाव: वर्तमान कानून में मौजूद ‘वक्फ बाय यूजर’ के आधार पर मौजूदा वक्फ संपत्तियों को चुनौती नहीं दी जा सकती, यदि इन संपत्तियों का उपयोग धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हो।
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वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम और महिला सदस्यों का समावेश: वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम और कम से कम दो महिला सदस्यों को नामित करने का प्रस्ताव किया गया है ताकि प्रबंधन में विविधता और समावेशिता बढ़े।
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जांच अधिकारी की नियुक्ति: वक्फ से जुड़े विवादों की जांच के लिए जिला कलेक्टर के स्थान पर राज्य सरकार द्वारा एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
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केंद्रीय डाटाबेस में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण: प्रत्येक पंजीकृत वक्फ संपत्ति की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय डाटाबेस में दर्ज करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण या विवाद की स्थिति में न्यायालय में जाने का अधिकार समाप्त हो जाएगा।
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न्यायाधिकरण के निर्णय की अपील: वक्फ न्यायाधिकरण के निर्णय अब अंतिम नहीं होंगे और उन्हें उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
वक्फ संशोधन विधेयक, 2024, में प्रस्तावित ये बदलाव वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार, पारदर्शिता और कुशलता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, विपक्षी दलों की आपत्तियों और मतभेदों के बावजूद, जेपीसी ने बहुमत के आधार पर इन संशोधनों को मंजूरी दी है। अब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर विस्तृत चर्चा और बहस की संभावना है।