UPPCL:
स्मार्ट मीटर के बिना संभव नहीं अलग-अलग बिजली दरें
भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2024 से देशभर में दिन-रात का अलग-अलग बिजली टैरिफ लागू करने का निर्देश दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे लागू करना अभी संभव नहीं है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) का कहना है कि यह व्यवस्था लागू करने के लिए सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य है, जिसमें कम से कम दो वर्ष का समय लगेगा। इसलिए 2027-28 तक प्रदेश में यह नई दरें लागू नहीं हो पाएंगी।
बिजली दरों में बढ़ोतरी के संकेत
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने 2025-26 के लिए नई बिजली दरें तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पांच वर्षों के लिए जारी मल्टी ईयर टैरिफ डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन-2025 के तहत अगले साल 2025-26 में नई दरें लागू की जाएंगी।
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पावर कॉर्पोरेशन की बिजली कंपनियों ने 1.16 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) संबंधी प्रस्ताव दाखिल किए हैं।
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नियामक आयोग अगले 120 दिनों में नई बिजली दरों की घोषणा कर सकता है।
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बिजली की दरों में 15 से 20% तक की वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
फिलहाल एक समान रहेंगी बिजली दरें
राज्य में सभी उपभोक्ताओं के लिए अभी बिजली की दरें एक समान ही रहेंगी। स्मार्ट मीटर न लग पाने के कारण अभी दिन और रात की अलग-अलग बिजली दरें लागू करना संभव नहीं है।
निजीकरण का रास्ता फिलहाल बंद
नए रेगुलेशन में 42 जिलों की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की योजना थी, लेकिन उपभोक्ता परिषद की आपत्तियों के चलते निजीकरण की व्यवस्था को हटा दिया गया है। अब फिलहाल उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में नहीं जाएगी।
रात-दिन अलग बिजली टैरिफ कैसे काम करेगा?
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बिजली दरें समय के अनुसार कम-ज्यादा हो सकती हैं।
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इस व्यवस्था के तहत दिन में बिजली महंगी और रात में सस्ती हो सकती है या इसके विपरीत भी हो सकता है।
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मौजूदा दर से 10-20% तक महंगी या सस्ती बिजली मिल सकती है।
बिजली चोरी का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा
नए रेगुलेशन के तहत बिजली चोरी से होने वाले नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से की जाएगी। पहले यह प्रावधान नहीं था, लेकिन अब बिजली चोरी की वजह से लाइन लॉस बढ़ने पर उसकी भरपाई उपभोक्ताओं को करनी होगी।
बिजली दरों में बढ़ोतरी और निजीकरण का विरोध जारी
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी और निजीकरण का विरोध किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली को रोकने के लिए परिषद संघर्ष करेगी।
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रात-दिन अलग टैरिफ लागू होने से गरीब उपभोक्ताओं को अधिक नुकसान होगा, इसलिए इसका विरोध किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में अभी दिन-रात की अलग-अलग बिजली दरें लागू नहीं होंगी। स्मार्ट मीटर लगाने में कम से कम दो वर्ष का समय लगेगा, इसलिए 2027-28 तक इस व्यवस्था के लागू होने की संभावना नहीं है। हालांकि, बिजली दरों में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा। बिजली चोरी का बोझ भी उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा, जिससे विवाद बढ़ सकता है। वहीं, निजीकरण का रास्ता फिलहाल बंद कर दिया गया है।