288/232: आज राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा, जिसे लोकसभा में 12 घंटे लंबी चर्चा के बाद पारित किया गया था। इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। विपक्ष के संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। अब यह विधेयक राज्यसभा में बहस और मतदान के लिए रखा जाएगा।
लोकसभा में विधेयक पर तीखी बहस
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कई नेताओं ने अपनी राय रखी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य किसी धर्म में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सुचारु रूप से चलाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने वक्फ कानून की विवादास्पद धारा 40 को हटाया गया है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता था और उस पर हाईकोर्ट में अपील भी नहीं की जा सकती थी।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और वक्फ बोर्ड को सरकारी संपत्तियों की लूट का लाइसेंस देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत में अब मुगलकालीन व्यवस्था और कानून को जगह नहीं मिलेगी।
सरकार का रुख: किसी धर्म में हस्तक्षेप नहीं
गृह मंत्री शाह ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार वक्फ ट्रस्ट में हस्तक्षेप नहीं करेगी। वक्फ मुतवल्ली, वाकिफ और बोर्ड सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा ही संचालित किए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गैर-मुस्लिमों की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी और यह विधेयक सिर्फ प्रशासनिक सुधारों के लिए लाया गया है।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
विपक्षी दलों ने इस विधेयक का यह कहकर विरोध किया कि इससे वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा और मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों पर हमला होगा। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और इससे मुकदमेबाजी बढ़ सकती है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का स्वामित्व अल्लाह के पास होता है, सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।
ओवैसी ने किया विधेयक का विरोध
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक का तीखा विरोध किया और सदन में इसकी प्रति फाड़ दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा।
बिल में क्या बदलाव किए गए?
- विवादास्पद धारा 40 हटाई गई: अब वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं कर सकता।
- हाईकोर्ट में अपील का प्रावधान: अब न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी।
- गैर-मुस्लिमों की भागीदारी नहीं होगी: विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिमों की कोई भूमिका नहीं होगी।
- विधेयक पूर्व तिथि से लागू नहीं होगा: इसका प्रभाव अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगा।
क्या होगा आगे?
अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर चर्चा होगी और मतदान के बाद यह कानून बन सकता है। अगर राज्यसभा में यह पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह लागू कर दिया जाएगा।
वक्फ संशोधन विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो रही है। सरकार इसे प्रशासनिक सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दे रहा है। अब देखना यह होगा कि राज्यसभा में इस पर क्या फैसला होता है।