उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना घरों को ध्वस्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने सरकार की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह देखकर हमारी अंतरात्मा को झटका लगा है कि आवासीय परिसरों को बिना उचित प्रक्रिया के बुलडोजर से ढहा दिया गया।
क्या है मामला?
प्रयागराज में प्रशासन ने कुछ घरों को अवैध निर्माण बताकर बुलडोजर से गिरा दिया। आरोप है कि मकान मालिकों को 24 घंटे का नोटिस देकर बिना अपील का अवसर दिए ही कार्रवाई की गई। इससे प्रभावित लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट गए, लेकिन वहां से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा:
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“यह देखकर हमारी अंतरात्मा को झटका लगा कि आवासीय परिसरों को मनमाने तरीके से ध्वस्त कर दिया गया।”
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“जिस तरीके से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, वह चौंकाने वाला है। अदालतें ऐसी प्रक्रियाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।”
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“अगर हम इस तरह की अवैध कार्रवाई को एक बार स्वीकार कर लेंगे, तो यह आगे भी जारी रहेगा।”
याचिकाकर्ताओं को राहत – दोबारा घर बनाने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपने खर्चे पर मकान फिर से बनाने की अनुमति दी, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखीं:
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याचिकाकर्ताओं को हलफनामा देना होगा कि वे निश्चित समय में अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करेंगे।
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वे भूखंड पर मालिकाना हक का दावा नहीं करेंगे।
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वे इस जमीन को किसी तीसरे पक्ष को नहीं देंगे।
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अगर उनकी अपील खारिज हो जाती है, तो उन्हें खुद ही अपने मकान गिराने होंगे।
‘उचित प्रक्रिया का पालन होगा’ – सरकार का बचाव
यूपी सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि भविष्य में उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों के कारण राज्य सरकार के लिए अनधिकृत निर्माण को नियंत्रित करना कठिन हो गया है।
क्या मकान गिराने का फैसला गलत था?
याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने यह मान लिया कि यह जमीन गैंगस्टर अतीक अहमद की है और बिना जांच किए मकान गिरा दिए गए।
गौरतलब है कि अतीक अहमद की 2023 में हत्या कर दी गई थी।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिलहाल स्थगित कर दिया है ताकि याचिकाकर्ता हलफनामा दाखिल कर सकें। अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि:
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क्या यूपी सरकार अपने बुलडोजर एक्शन पर पुनर्विचार करेगी?
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क्या अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
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क्या यह मामला सरकार के लिए नजीर बनेगा और आगे बुलडोजर कार्रवाई में सावधानी बरती जाएगी?
अब यह देखना होगा कि इस पूरे विवाद का कानूनी नतीजा क्या निकलता है। क्या सुप्रीम कोर्ट यूपी सरकार की इस कार्रवाई को पूरी तरह असंवैधानिक घोषित करेगा या कुछ और निर्देश देगा?