राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। बेंगलुरु में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में आरएसएस ने स्पष्ट रूप से कहा कि बांग्लादेश के हिंदू भारत की जिम्मेदारी हैं और हम इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
मोदी सरकार के प्रयासों से संघ संतुष्ट
बैठक में पारित प्रस्ताव में मोदी सरकार के प्रयासों की सराहना की गई और उनसे आग्रह किया गया कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखें।
भाजपा के साथ टकराव की अटकलों को किया खारिज
बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि आरएसएस और भाजपा के बीच किसी भी प्रकार का टकराव नहीं है। आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि समाज और राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर हम मिलकर काम करते हैं।
बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ अन्याय और हिंसा
बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा केवल सत्ता परिवर्तन की वजह से नहीं हुई, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया रही है।
🔹 हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को बांग्लादेश सरकार और सरकारी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है।
🔹 भारत विरोध को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
🔹 पाकिस्तान और अमेरिका के डीप स्टेट (गुप्त संस्थाएं) इस हिंसा में भूमिका निभा रही हैं।
दुनियाभर के हिंदुओं को आगे आना होगा
आरएसएस ने पूरी दुनिया में बसे हिंदुओं से अपील की कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं। भारत सरकार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने की मांग की गई।
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर बयान
आरएसएस ने यह भी संकेत दिया कि भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष जल्द चुना जाएगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भाजपा का आंतरिक मामला है और आरएसएस इसमें कोई दखल नहीं देता।
आरएसएस की गतिविधियों की समीक्षा
बैठक के दौरान संघ के पिछले एक साल के कार्यों की समीक्षा और मूल्यांकन किया गया। अरुण कुमार ने कहा कि 100 साल पहले आरएसएस ने जो राष्ट्र निर्माण और समाज संगठन का कार्य शुरू किया था, वह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रविवार को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले इस बैठक में लिए गए फैसलों की विस्तृत जानकारी देंगे।